क्या दीपू कभी इस जाल से बाहर निकल पाएगी? या फिर वह इसी तरह मर्दों की गुलाम बनकर रह जाएगी?
गाँव की गरीब लड़की की कहानी
गाँव की एक छोटी-सी झोपड़ी में रहने वाली दीपू बहुत गरीब थी। उसके पिता बीमार थे, और घर में खाने तक के पैसे नहीं होते थे। मजबूरी में उसने देह व्यापार शुरू किया। गाँव के कुछ लालची मर्द उसके पास आते, पैसे देते और उसके जिस्म का मज़ा लेते। दीपू का दिल रोता था, पर भूख के आगे उसे यह सब करना पड़ता।
समय बीता, तो एक लड़के ने उससे शादी कर ली। शादी के बाद भी दीपू का पति उसे पैसे कमाने के लिए धकेलता रहा। वह चाहकर भी इस गंदे धंधे से बाहर नहीं निकल पाई। रात-रात भर अजनबी मर्द उस पर हावी होते, और सुबह होते ही वह घर का काम करती।
उसकी ज़िंदगी एक चक्की की तरह थी—जिसमें वह हर रोज़ पिसती रहती। कभी पति के लिए, कभी पैसों के लिए, तो कभी मजबूरी के लिए। लेकिन अब उसकी आदत हो चुकी थी... शायद उसे इसी में मज़ा आने लगा था।
क्या दीपू कभी इस जाल से बाहर निकल पाएगी? या फिर वह इसी तरह मर्दों की गुलाम बनकर रह जाएगी?
(पाठकों को और रोमांचित करने के लिए अगले भाग में जारी...)
कमेंट करके बताएं, आपको कहानी कैसी लगी? अगर आप चाहते हैं कि दीपू की कहानी और गहराई से लिखी जाए, तो ज़रूर बताएं! 😉🔥
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