यह करते हो तो आप की आँखों को ठीक होना पड़ेगा

यदि हम आँखों की बाहरी रूप से सही देखभाल नहीं करते है . आयुर्वेद के अनुसार यदि हमारा भोजन आँखों की प्रकृति के विरुद्ध है . किसी भी दृश्य को देखकर मन में घृणा करने से भी आँखे खराब होती है .

यह करते हो तो आप की आँखों को ठीक होना पड़ेगा

दोस्तों आज हम आँखों की समस्या पर बात करते है .

आज के समय में आप खुद देख रहे हो की छोटे छोटे बच्चों की आँखों पर चश्मे चढ़ रहे है .

जब हमारी आँखों में कोई समस्या होती है तो हमे बहुत बुरा लगता है .

क्यों की आँखे हमारे जीवन का अभिन्न अंग है .

चलिए अब बात करते है की आँखों की समस्याएं क्यों पैदा होती है ?

  • यदि हम आँखों की बाहरी रूप से सही देखभाल नहीं करते है
  • आयुर्वेद के अनुसार यदि हमारा भोजन आँखों की प्रकृति के विरुद्ध है
  • यदि आँखों की ज्योति बढ़ाने के लिए दवाओं का अधिक प्रयोग करते है
  • या आँखों के लिए उचित व्यायाम हम नहीं करते है
  • या आनुवांशिकता के कारण आँखों में पीड़ा होती है
  • या मोबाइल , टीवी अधिक तेज रौशनी को बहुत ज्यादा देखते है
  • किसी भी दृश्य को देखकर मन में घृणा करने से भी आँखे खराब होती है
  • या किसी भी दृश्य को देखकर उससे बहुत ज्यादा लगाव पैदा कर लेते है
  • या दवाओं के साइड इफ़ेक्ट के कारण भी आँखे खराब होती है
  • या हम चिंता ज्यादा करते है तब भी आँखे खराब होती है
  • या आँखों में छोटी छोटी समस्या होने पर उसे सहन न करके उसके लिए दवा ले लेने से भी आँखे खराब होती है

कई बार आँखे खुद को ठीक करने के लिए आँशु छोड़ने लगती है और हम इसे बीमारी समझ लेते है

आँखों से सम्बंधित ध्यान क्रियाये नहीं करने के कारण भी आँखे खराब होने लगती है

कुल मिलाकर जब आँखों में प्राण शक्ति की कमी होने लगती है तो फिर हमारी आँखे खराब होने लगती है .

आइये अब आँखों के सभी रोगों को ठीक करने के लिए स्थायी समाधान पर बात करते है

सबसे पहले आप हमारे स्वरुप दर्शन क्रिया के लेखों को ध्यान से पढ़े . इससे आप को आँखों की कार्यप्रणाली समझ में आने लगेगी .

अब आप अभी वर्तमान में अपनी आँखों को ठीक करने के लिए जो कुछ भी उपाय कर रहे है उसे करते रहे . पर आप अभी से अपने मन को पूरी जाग्रति के साथ देखना शुरू करे .

यदि आप आँखों के लिए त्रिफला का प्रयोग अभी नहीं कर रहे है तो इसे आप निम्न प्रकार से करे :

शुद्ध त्रिफला एक चम्मच रात को या सुबह एक कप पानी में भिगो दे

अब लगभग बारह घंटे बाद इस पानी को हिलाकर चार तह के सूती सफ़ेद कपड़े से छान ले

आप किसी मेडिकल की दूकान से आयी केप लाकर अब अपनी आँखों पर इस आयी कैप में त्रिफला का पानी भरकर पहले एक आँख या दोनों में एक साथ इस प्रकार से लगाए की आप आकाश के तरफ देख सके और त्रिफला का पानी आयी केप से बाहर न निकल पाये

अब आप इस प्रकार अपनी क्षमता के अनुसार आँखों के हीरे को गोल गोल घुमाये

ऐसा आप लगातार सात दिन तक करे

इसके बाद तीन दिन का गैप दे

फिर से इस त्रिफला प्रयोग को ठीक इसी प्रकार से सात दिन के लिए करे

ऐसा करने से कुछ दिनों बाद आप को इतना अच्छा लगेगा की आप खुश हो जायेंगे

फिर आप बाद में आप अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते है .

यह तो हुयी बात आँखों के ऊपर प्रयोग की

अब बात करते है आँखों के लिए पेट में खाने की दवा की

रोज रात को बहुत ही ध्यान और ख़ुशी तथा स्वाद के साथ एक चम्मच त्रिफला पानी के साथ ले .

पहले इस त्रिफला को जीभ से चाटे फिर ऊपर से पानी की एक घुट ले .

ऐसा आप पंद्रह दिन तक रोज करे . फिर इसके बाद एक दिन छोड़कर ले

अर्थात आप को किसी भी इलाज की आदत नहीं डालनी है

जब भी आप को समय मिले तो त्राटक क्रिया का अभ्यास करे

अब सबसे जरुरी बात पर आते है

आँखों में होने वाले किसी भी परिवर्तन से बिलकुल भी न डरे . क्यों की स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से आप की आँखों में कई प्रकार के परिवर्तन होना शुरू हो जाते है . इसलिए आप से हमारा विनम्र अनुरोध है की आप हमारे बताये सभी उपाय पूरी श्रद्धा और सच्ची भक्ति से करे .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .