मेरे भाई क्या आप पत्नी से परेशान है ?

मेरे प्यारे भाई आप मेरे इस लेख को तभी पढ़ना जब यदि आप अपनी पत्नी से परेशान हो . और यदि आप अपने पति पत्नी के रिश्ते को और मजबूत बनाना चाहते हो तो भी आप को मेरा यह लेख शत प्रतिशत लाभ पहुँचायेगा .

मेरे प्यारे भाई आप मेरे इस लेख को तभी पढ़ना जब यदि आप अपनी पत्नी से परेशान हो . और यदि आप अपने पति पत्नी के रिश्ते को और मजबूत बनाना चाहते हो तो भी आप को मेरा यह लेख शत प्रतिशत लाभ पहुँचायेगा .

आज मै आप को स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास 'पत्नी से मधुर सम्बन्ध कैसे बनाये ?' के लिए विस्तार से समझाने जा रहा हूँ .

सबसे पहले तो आप यह स्वीकार करे की आप की पत्नी आप ही के कर्मो का परिणाम है . अर्थात जैसा आप ने आज तक अपनी पत्नी को महसूस कराया है वैसा ही आप को वापस मिला है .

इसके साथ ही कई बार आप ने पत्नी को बहुत प्यार किया है पर फिर भी आप की पत्नी ने जवाब में आप को दुःख ही पहुंचाया है .

ऐसा कैसे हो गया ?

क्यों की अभी आप पूरी तरह जाग्रत नहीं हुए है . इसलिए अभी आप को आप के पुराने संचित कर्म याद नहीं है .

पर आप का प्रारब्ध निरंतर फलित हो रहा है चाहे आप को इसका ज्ञान हो या नहीं हो .

यदि आप अपने प्रारब्ध के प्रति जागरूक रहने का अभ्यास करने लग जाओ तो धीरे धीरे आप को यह ज्ञान प्राप्त होने लगेगा की आप का व्यवहार पत्नी के लिए कैसा हो ताकि आप का दुखी रिश्ता मधुर सम्बन्ध में बदलने लग जाए .

जितना आप अपने साथ पत्नी के माध्यम से हो रहे व्यवहार से घृणा करेंगे उतना ही आप की पत्नी का व्यवहार आप के प्रति खराब होता जायेगा .

आप ने कई बार देखा होगा की आप की पत्नी आप से तो बहुत बुरा बर्ताव करती है और उसके किसी अन्य परिचित या मित्र या रिश्तेदार से बहुत ही मीठा बोलती है . तथा साथ ही आप ने कई बार यह भी देखा होगा की कई व्यक्ति आप की पत्नी को उसकी गलती पर सही राय देते है तो आप की पत्नी भी उनकी राय को सिर माथे पर रखकर मान लेती है .

ऐसा क्यों होता है आप के साथ ?

मेरे भाई यह सब आप ही के कर्मो का सारा खेल है . जिनसे आप की पत्नी का सम्बन्ध अच्छा है उसका कारण उनके मनो का आपस में मिलना होता है .

अर्थात जब दो इंसानो का या किसी भी प्रकार के जीवों का मन मिलकर धीरे धीरे एक जैसा होने लगता है तो फिर ऐसे जीव एक दूसरे से रोज खूब लड़ाई झगड़ा करने के बावजूद भी एक दूसरे को बहुत प्रेम करते है .

आप ने भी देखा होगा की कई पति पत्नी के जोड़े रोज जब तक एक दो घंटे झगड़ा नहीं कर लेते तब तक उनका खाना भी हज़म नहीं होता है .

ऐसा क्यों होता है ?

क्यों की ऐसा प्रभु की माया के नियमोँ के कारण होता है .

सबसे पहले आप पत्नी के साथ मोन रहने का अभ्यास करे . और अपनी पत्नी को भीतर ही भीतर धन्यवाद देने का अभ्यास करे . क्यों की आप बहुत भाग्यशाली है इसलिए आप को प्रभु के माध्यम से स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास सिखने को मिल रहा है .

और जब आप यह अभ्यास सच्ची श्रद्धा से करते है तो आप को महसूस होने लगता है की आप के बुरे कर्म आप की पत्नी के माध्यम से कट रहे है .

तभी तो महान संतो ने कहा है की 'निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय'.

अर्थात यदि आप की पत्नी आप ही के सामने आप की निंदा करती है तो आप को भीतर से खुश हो जाना चाहिए की आप के बुरे कर्म कट रहे है .

जिस प्रकार व्यायाम करते समय हमे थकान महूस होती है पर बाद में इसी व्यायाम का परिणाम हमे स्फूर्ति के रूप में मिलता है .

ठीक इसी प्रकार से आप के अवचेतन मन में जितने भी पुराने बुरे और अच्छे संचित कर्म है वे अब पत्नी के माध्यम से फलित हो रहे है .

यदि आप इन कर्म फलों का विरोध करेंगे तो फिर से आप नए कर्म बाँध लेंगे . और फिर आप का पत्नी से सम्बन्ध हमेशा खराब ही रहेगा .

पर यदि आप अपनी पत्नी के अच्छे , बुरे व्यवहार को भीतर से जाग्रत रहते हुए सहन कर लेते है तो फिर यह आप के हाथ में है की अब आगे आप अपनी पत्नी से कैसा सम्बन्ध बनाना चाहते है .

आप मेरे कहने से केवल सात दिन स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करके देखे . इसके परिणाम आप को ख़ुशी से आश्चर्य चकित कर देंगे .

स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से आप को धीरे धीरे अपनी पत्नी में ही देवत्व भाव जगता हुया दिखाई देने लगेगा .

अभी आप विस्मृति के कारण अपनी पत्नी को एक भोग सामग्री के रूप में ही देखते है . अभी आप यह नहीं समझ पा रहे है की आप खुद और आप की पत्नी दोनों अपनी अपनी जगह महान है . आप दोनों ईश्वर के माध्यम से रची गयी दो अनमोल विभूतियाँ हो .

मेरे भाई आप कोई साधारण इंसान नहीं हो . आप के भीतर हमारे सब के प्यारे प्रभु की ज्योति दमक रही है .

मेरे भाई आप से मेरा निश्वार्थ प्रेम सम्बन्ध होने के कारण मै आप को शत प्रतिशत सच कह रहा हूँ की आप अपनी पत्नी में ही भगवान का रूप देखने का अभ्यास कीजिये .

आप अपनी पत्नी के आगे सच्चे ह्रदय से समर्पण कर दीजिये उनको भगवान मानकर . तो मै आप से कहता हूँ की दुनिया की कैसी भी ताकत आप के रिश्ते को मधुर होने से नहीं रोक सकती है .

क्यों की यह पूरी दुनिया प्रभु के प्रेम के धागे से ही बुनी हुयी है . और ऐसा करके आप एक प्रेम का धागा अपनी पत्नी की कलाई पर बांध दीजिये .

इससे हमारे प्रभु बहुत ही प्रसन्न होते है .

अब मै स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से यह समझाने जा रहा हूँ की आप अपनी पत्नी से रिश्ते को दुबारा से नए सिरे से कैसे मधुर बनाये ?

इसके लिए आप अपने मन को रचनात्मक तरीके से कार्य करने वाला प्रशिक्षण दे . रोज २४ घण्टे में से कम से कम एक घंटा पूर्ण एकांत में बिताने का अभ्यास करे .

और इस एकांत समय के दौरान आप अपने मन से बात करे . अपने मन को पहले समझे की आखिर यह कार्य कैसे करता है .

शुरू में आप का मन आप को एकांत से भगाएगा . पर आप जब बार बार स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करेंगे अर्थात सिर से लेकर पाँव तक में एकाग्र होकर आप के भीतर और बाहर जितनी भी क्रियाये घटित हो रही है आप उनके प्रति जाग्रत होकर अपने मन को पहले समझने का अभ्यास करते है तो आप को महसूस होने लगता है की आप किसी अलौकिक शक्ति के निर्देश में ही कार्य कर रहे है .

और इसी अलौकिक शक्ति के कारण आप पूर्ण रूप से सुरक्षित है . इसलिए जब आप के भीतर रचनात्मकता विकसित होने लगती है तो आप नए नए आविष्कार करने लगते है . और फिर अपनी पत्नी से कहो देखो मेने कल क्या नया बनाया है .

और साथ ही आप की पत्नी से भी पूछो की आप ने क्या नया बनाया है ?.

यदि आप की पत्नी कहती है की मेने तो कुछ भी नया नहीं बनाया है . तो भी आप यह कहे अरे यह तो बहुत अच्छी बात है आप अभी भी पुराने से इतना प्यार करती हो .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .