इसे पढ़ते पढ़ते ही आप का मन शांत होने लगेगा . और आप की निम्न समस्याएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी : कैसी भी बीमारी ,कैसा भी,मानसिक रोग,कैसी भी गरीबी ,कैसा भी पूर्व जन्म का रोग,कैसा भी पुराना कर्म
इसे पढ़ते ही मन को शांत होना पड़ेगा
मेरे प्रिय मित्रों आप चाहे कैसी भी समस्या से पीड़ित हो आज का यह लेख यदि आप बहुत कम भी अपने आप से प्रेम करते हो तो इसे अवश्य पढ़े .
इसे पढ़ते पढ़ते ही आप का मन शांत होने
लगेगा . और आप की निम्न समस्याएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी :
- कैसी भी बीमारी
- कैसा भी मानसिक रोग
- कैसी भी गरीबी
- कैसा भी पूर्व जन्म का रोग
- कैसा भी पुराना कर्म
- कैसा भी वहम
- कैसी भी चिंता
- कैसा भी डर
और आप की निम्न इच्छाएँ पूरी होगी :
- आत्मज्ञान की प्राप्ति
- भगवान की प्राप्ति
- सभी सपने
- हर पल ख़ुशी और संतुष्टि की अनुभूति
मित्रों भगवान हमे कभी कोई कष्ट नहीं देते है . बल्कि हमारे परमपिता हमे हर वह शक्ति और ज्ञान और सुख साधन देते है जिससे हम हरपल खुश भी रह सकते है और हरपल दुखी भी रह सकते है . अर्थात इस पूरे संसार में आप को आप के अलावा कोई अन्य जीव सुख या दुःख नहीं पंहुचा रहा है . आप खुद ही आप के मन की कार्य प्रणाली को नहीं समझने के कारण सुखी या दुखी होते है . अर्थात अभी आप मन के गुलाम है . इसलिए जैसा आप का मन आप से करवाता है आप यह करते जाते है और अपने आप को मंझे की तरह उलझा लेते है .
अब आप जिसके पास खुद को सुलझाने के लिए
जाते है तो वहाँ भी आप को हताशा और निराशा ही हाथ लगती है .
ऐसा क्यों होता है ?
क्यों की अभी वह खुद ही आप ही की तरह मंझे के जैसे गुच्छों के रूप में उलझा हुआ है . अर्थात एक खुद बंधा हुआ आदमी दूसरे बंधे हुए आदमी को कैसे बंधन मुक्त कर सकता है .
जैसे आप ने कई बार देखा होगा की जिन घरों में माता पिता रोज लड़ाई झगड़ा करते है तथा कई बार तो पशुओं से भी बुरी लड़ाई करते है . पर फिर भी उनके बच्चे शादी करते है .
उनके बच्चे ये सब देख रहे है की कैसे मेरे माता पिता पशुओं की तरह झगड़ रहे है . और आप ने यह देखा होगा की जब यह लड़ाई होती है तब ये बच्चे भी लड़ाई में कई बार कूद जाते है और कहते है की चाहे हमारे प्राण निकल जाये पर हम तो जीवन में कभी शादी नहीं करेंगे .
पर फिर जब यही माता पिता और बच्चे घर
में किसी नयी चीज के आने पर बहुत ख़ुशी मनाते है . और इसी ख़ुशी के प्रलोभन में
जीवनभर कुंवारे रहने वाले बच्चे कब शादी कर लेते है इसका कइयों को तो पता ही नहीं
चलता है .
अर्थात जब आप दुखी होते है तो खुद से और लोगों से लाख वादे करते है की मै तो ऐसा कोई काम नहीं करूँगा जिससे मुझे या किसी और को दुःख पहुंचे .
पर फिर होता क्या है . आप फिर से वही काम करते है जिस काम के करने पर आप ने कभी अपने प्राणों की रक्षा के लिए बहुत उपाय किये थे .
मन होता ही ऐसा ही है .
अर्थात आप का मन आप को छिपकर या धोखे से नहीं फसा रहा है . बल्कि आप को बहुत ही साफ़ साफ़ अनुभव करके सतर्क कर रहा है . जैसे आप सड़क पर एक दुर्घटना होते हुए अपनी आँखों से देखते हो और आप ने देखा की तेज रफ़्तार के कारण यह दुर्घटना हुयी है . और आप ने देखा की इस दुर्घटना में पूरा परिवार एक मासूम को अकेला छोड़कर मर गया है . पर फिर भी आप गाड़ी धीरे चलाने का अभ्यास नहीं करते है .
आप
को इतना बढ़ा सबक मिलने के बाद भी आप का मन आप को कैसे वश में कर लेता है ?
क्यों की आप खुद से सच्चा प्रेम करते ही नहीं है .
यदि आप खुद से सच्चा प्रेम करते तो आप को यह अनुभूति होती की जिस का परिवार ख़त्म हुआ है उसका सम्पूर्ण दुःख आप को अनुभव होता . और आप को यह मह्सूस होता की किसी अन्य का नहीं बल्कि मेरा खुद का परिवार ही ख़त्म हुआ है . तब आप खुद से सच्चे प्रेम की तरफ एक कदम आगे बढ़ते है .
और ऐसी परिस्थिति में ही आप को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से एकता की अनुभूति होती है . यदि आप खुद से सच्चा प्रेम करते है तो फिर आप अपने आप ही पूरे संसार से सच्चा प्रेम करने लगते है .
आप
की आँखे बाहर क्यों देखना चाहती है ?
क्यों की अभी आप को यह पता ही नहीं है की भीतर और बाहर दो अलग अलग स्थान नहीं है . वास्तविक सत्य यह है की मेरे रूप में भी आप ही है और आप के रूप में भी मै ही हूँ . फिर कैसे हम दोनों एक दूसरे को कष्ट पंहुचा सकते है .
पर फिर आप के साथ ऐसा क्यों हो रहा है ?
क्यों की अभी आप शरीर भाव में हो और आप परिवर्तन को सहन नहीं कर पा रहे हो . जैसे आप को कोई काम करना पसंद है . तो आप यह चाहते है की मुझे इस काम में हमेशा ख़ुशी ही मिलती रहनी चाहिए .
जबकि जब तक आप को कष्ट की अनुभूति नहीं होगी तब तक आप खुश नहीं रह सकते . अर्थात लगातर मिलती हुयी ख़ुशी ही कष्ट में बदल जाती है .
जैसे किसी को लहुसन प्याज खाने से कष्ट
मिला है तो वह अब सभी को यह बात समझा रहा है की लहुसन प्याज नहीं खाने चाहिए .
जबकि वह किसी को यह नहीं समझा रहा है की उसने खुद ने क्या गलती की है . या तो उसने लहुसन प्याज ज्यादा मात्रा में खा लिए है . या उसके मन में लहुसन प्याज को लेकर पहले से ही द्वन्द चल रहा था . अर्थात जब तक आप किसी भी क्रिया को करते हुए जाग्रत नहीं रहते है तो फिर इन क्रियाओं के प्रभाव आप को समझ में नहीं आते है और आप इन्ही प्रभावों को सुख दुःख कहने लगते है .
कोई व्यक्ति जर्दा या गुटखा खाता है जबकि इसके पैकेट पर लिखा होता है की गुटखे से कैंसर होता है . और फिर यही व्यक्ति लम्बा जीवन जीने का सपना देखता है .
जब ऐसे व्यक्ति को कोई गुटखा न खाने की सलाह देता है तो फिर यह व्यक्ति कहता है की मेरे अमुक मित्र ने तो पूरे जीवन भर गुटखा खाया था और सौ वर्ष तक स्वस्थ जीवन जिया था .
पर यह व्यक्ति कभी खुद पर गौर नहीं करता
है की यह गुटखा मेरे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव डाल रहा है .
अर्थात हम सभी जिस क्षण जिस भाव में रहते है उस क्षण वैसी ही बाते करते है .
अर्थात अभी हम सभी एक स्वप्न देख रहे है . पर यही स्वप्न जब आप जाग्रत होकर देखते है तो फिर पूरा जीवन आनंदित होने लगता है .
मतलब एक बार और या मै खुद अनुभव करना चाहता हूँ का भाव जब हमे सत्य से रूबरू कराता है तो भी हम वहाँ ज्यादा देर रुकते नहीं है . बल्कि बहुत जल्दी पुरानी आदत में जा जाते है .
वास्तविक सत्य यह है की आप के पास केवल
यही क्षण है . अब आप को यह निर्णय लेना है की आप इस क्षण को कैसे जीते है .
- आप इस क्षण को कोई भी काम खुश होकर करते हुए जी सकते है
- इस क्षण में किसी की सेवा कर सकते है
- इस क्षण में खुद की सेवा कर सकते है
- इस क्षण में नाम जप कर सकते है
- इस क्षण में नींद ले सकते है
- इस क्षण में श्वास को महसूस कर सकते है
- इस क्षण में पुरानी बुरी घटना याद कर सकते है
- इस क्षण में किसी की उधारी चूका सकते है
- इस क्षण में किसी को माफ़ कर सकते है
- इस क्षण में मुस्करा सकते है
- इस क्षण में जो है उसमे राजी रह सकते है
- इस क्षण में आप कृतज्ञता का अभ्यास कर सकते है
- इस क्षण में आप पूरे संसार को अपना मित्र मान सकते है
- इस क्षण में आप अपने मन को शांत रख सकते है
अब यह आप के ऊपर है की आप इस क्षण को कैसे जीते है .
जैसे आप इस क्षण को जीने का अभ्यास करते
है आप के लिए अगला क्षण इसी भावों के अनुसार तैयार होता है .
इसलिए स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास इस क्षण में जीने का अभ्यास है .
धन्यवाद जी . मंगल हो जी .
Comments (0)
Login to comment.
Share this post: