अब मेरे मित्रों स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास जल्दी से शुरू कर दो और अपने बचपन में लोट चलो . और जी भर के जीलो अपनी इस खुशनुमा जिंदगी को .
आओ बचपन में चले
आओ बचपन में चले
मेरे भाई याद करो वो दिन जब आप निकर पहनके स्कूल जाते थे . और चवन्नी में बीस मिठाई खाते थे .
फिर हमारे गुरूजी कक्षा में आते ही हम एक सन्नाटे में चले जाते थे .
ऐसे लगता था जैसे पूरी कक्षा को लकवा मार गया हो .
फिर
गुरूजी कहते थे मोहन मेने जो कल बीस मीनिंग याद करने के लिए दी थी वो याद कर लाये
क्या ?
अब मोहन कहता था, जी गुरूजी याद कर
लाया हूँ . सुन लो .....
अब जैसे ही गुरूजी मोहन से मीनिंग सुनना शुरू करते थे हम सभी डरे हुए रहते थे .
जिस को मीनिंग
अच्छे से याद होती थी वो लड़का या लड़की पूरी कक्षा में स्याता था . मतलब डींग
हांकता था .
वो अपने आपको कक्षा का राजा या रानी समझता था .
अब मोहन यदि कोई मीनिंग नहीं सुना पाता था तो गुरूजी डंडे से मोहन की ठुकाई करते थे .
इस ठुकाई को देखकर हम में से किसी को तो डर लगता था और हम यह सोचते थे की कही हम भी मीनिंग भूल नहीं जाए .
और
हम में से किसी किसी छात्र को मोहन की ठुकाई होते देख हंशी आती थी .
जब चार पीरियड पूरे हो जाते थे तो हमारी खेलघण्टी हो जाती थी .
खेलघण्टी में हम सब एक पकड़ दस खेलते थे .
मै तो खो खो भी खेलता था . और मेरी बहिने डाकण डिब्बा खेलती थी .
फिर कई बार मेरा दोस्त गुल्या पटेल मेरे बेग में से टिफिन चुराकर खाना खा जाता था . और मेरे टिफिन में कटे हुए कांदा डाल कर टिफिन को अच्छे से बंद करके मेरे बेग में वापस रख देता था .
गुल्या पटेल खुद का टिफिन नहीं खाता था . क्यों की गुल्या की मम्मी बहुत ही चरपरी सब्जी बनाती थी .
और गुल्या पटेल मीठा खाने का चिटोकड़ा था .
स्कूल की छुट्टी होते ही हम सब कक्षाओं से बाहर भागते थे .
मै तो मेरे दोस्तों के साथ सीधा घर नहीं आता था . बल्कि मै और मेरा दोस्त एक ही साइकिल से सड़क पर घूमने चले जाते थे .
आप याद करो मेरी बहिन जब आप बहुत छोटी थी और आप के नाक से आधा फिट लम्बा सैंडा लटकता था . उस सैन्डे के साथ भी आप बहुत खुश थी . और अब आप के साथ ऐसा क्या हो गया है की आज आप एक शहर की उच्च अधिकारी होते हुए भी खुश नहीं हो .
याद करो मेरे भाई जब आप अपने बचपन में
गुल्ली डंडा खेलते थे तो आप उन दो लकड़ी के डंडो के साथ भी खुश थे .
और आज ऐसा क्या हो गया है मेरे भाई आप के साथ जो आप आज दो लाख के मोबाइल पर गेम खेलते हुए भी तनाव को दूर करने के लिए रोज गोली खा रहे हो .
तू
भी याद कर रामप्यारी जब तू घघरी पहनके घर में तेरे भाई लल्या के सामने जा जा कर
खूब इतराती थी .
आज मेरी प्यारी रामप्यारी बहिन तेरे साथ ऐसा क्या हो गया है ससुराल में जो अब तुझे इस बीस हज़ार की साड़ी में भी वो ख़ुशी नहीं मिल रही है जिसे तुमने बचपन में ही पा लिया था .
और सुन मेरे कलेक्टर पप्पू भाई आज तू ऐसे कैसे गुमसुम रहता है . आज तो पूरे शहर का पप्पू तू कलेक्टर है और तेरे से यह तीन लोग काबू में नहीं हो रहे है .
याद कर पप्पू जब पूरे गाँव में तेरी तूती बोलती थी . और आज मेरा ये पप्पू कलेक्टर चुप है और शहर में गुंडे ही गुंडे बोल रहे है .
तू कब दहाड़ेगा मेरे पप्पू .
चल
तू मुझे सच सच बता पप्पू क्या भाभी तेरी ठुकाई करती है ?........
चल मेरी छमिया मै तुझे मेरे बचपन की एक बहुत ही रोचक बात बताता हूँ :
जब मै छोटा था तब मै यदि मेरी मम्मी को बोल देता था की मम्मी मुझे आज हलवा खाना है . तो मेरी मम्मी घर का सारा काम छोड़कर मेरे लिए हलवा बनाकर लाती थी .
और आज मेरी छमिया मै तुझे रोटी के लिए बोल देता हूँ तो तू मुझे बीस भजन सुनाने लगती हो .
थोड़ा रहम कर मेरी
छमिया रहम कर .....
तू भी याद कर मेरे भाई जब बचपन में खेत पर तेरे दोस्तों के साथ नंगा ही खड़ा खड़ा शुशु करता था और कूल्हे मटकाता था .
आज तेरे इन
कूल्हों में ऐसा क्या हो गया है की अब इन्हे थोड़ा सा हिलाने पर ही तुझे बहुत डर
लगता है .
मुझे तो लगता है
मेरे भाई हम सभी को यह ज्ञान ले बैठा .
हम कुछ ज्यादा ही समझदार हो गए भाई . और यही समझदारी हमे रात दिन दीमक की तरह खा रही है .
चल उठ मेरे दोस्त मै तुझे अब खेत पर लेकर चलता हूँ . याद कर वो बचपन जब तू मिट्टी से खिलौने बनाता था . और फिर मिट्टी में ही लोट पॉट हो जाता था .
तब तेरे गाल बिना किसी क्रीम के चमकते
थे .
और आज तेरे इन गालों को क्या हो गया है की तुझे इन्हे चमकाने के लिए दो हज़ार रूपए की क्रीम लगानी पड़ रही है .
तू जिंदगी को बचपन की तरह जी मेरे भाई .
तुझे आखिर किस बात की चिंता है .
याद कर मेरी प्यारी बहना जब तेरी सहेली से तेरा झगड़ा हो जाता था तो तू उसके हाथ पर जोरदार बटका भर जाती थी . और वो जोर जोर से रोती थी .
और आज तेरे साथ ये क्या हो गया है की सब लोग तेरे बटका भर रहे है .
मेरी बहन तूने अपने आप को खुद बड़ा मानकर
घायल कर लिया है .
अब मेरे मित्रों स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास जल्दी से शुरू कर दो और अपने बचपन में लोट चलो .
और जी भर के जीलो अपनी इस खुशनुमा जिंदगी को .
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धन्यवाद जी . मंगल हो जी .
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