शरीर को आकर्षक बनाने का अभ्यास

अब आप अपने शरीर को ऐसी स्थिति में रखे ताकि मै जो अभ्यास समझा रहा हूँ उसे आप सही से समझ सके . शरीर और मन को थकाकर किया गया व्यायाम , प्रार्थना , भक्ति या अन्य क्रिया हमेशा थकाने वाला परिणाम ही देती है .

इस संसार में आकर्षक कौन नहीं दिखना चाहता है ?. हर कोई अपने शरीर को आकर्षक बनाना चाहता है .
पर फिर सफलता सबको क्यों नहीं मिलती है ?


क्यों की सब व्यक्ति इस अभ्यास को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते ही नहीं है .
यदि आप मेरे माध्यम से निचे बताये जा रहे अभ्यास को सच में समझकर शुरू कर देते है तो परमात्मा आप को आकर्षक बनाकर ही मानेंगे . क्यों की यह विधाता का नियम है की यदि आप ने कोई कर्म किया है तो उसका फल आप ही को अवश्य मिलेगा .


अब मेरे मित्रों मै आप को अभ्यास देने जा रहा हूँ :
आप अपनी सुविधानुसार कोई एकांत स्थान चुन ले .


अब आप अपने शरीर को ऐसी स्थिति में रखे ताकि मै जो अभ्यास समझा रहा हूँ उसे आप सही से समझ सके .
जैसे यदि आप को मेने यह कह दिया की आप कमर सीधी करके बैठ जाए और अब आप धीरे धीरे अपने मन का ध्यान श्वास पर लेकर आये .


तो होगा क्या की जिन साधको से कमर सीधी करके नहीं बैठा जा रहा है वे जबरदस्ती कमर सीधी करके बैठेंगे और फिर परेशान होते हुए मेरी इन बातों को समझने का प्रयास करेंगे .
और हम सभी को यह पता है की जीवन में परेशान होकर जो कुछ भी हम कर्म करते है उसका फल भी परेशान करने वाला ही होता है .


अर्थात जब तक आप अभ्यास खुले दिल से नहीं करेंगे तब तक आप अपने शरीर को आकर्षक नहीं बना सकते है .
शरीर और मन को थकाकर किया गया व्यायाम , प्रार्थना , भक्ति या अन्य क्रिया हमेशा थकाने वाला परिणाम ही देती है . यह प्रकृति का अटल सत्य है .


अब मै समझता हूँ की आप ने अपने शरीर को ऐसी स्थिति में रख लिया है की अब आप आगे के अभ्यास को समझकर करने के लिए तैयार है .
मै आप को स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास शरीर को आकर्षक बनाने के लिए सीखा रहा हूँ .
अब यदि आप को आँखे बंद करके अभ्यास करने में अच्छा लगता है तो अपनी आँखे धीरे से बंद करले .
अब अपने मन का ध्यान श्वास पर लेकर आये .


आप के नाक से आती जाती श्वास को बहुत ही अच्छी तरह से महसूस करे . जैसे जैसे आप अपनी इस श्वास को महसूस करने लगेंगे आप का मन धीरे धीरे शांत होने लगेगा .
इससे आपका मन बाहर की चकाचौंद से हटकर आप के शरीर पर आने लगेगा . और मन को जब शरीर पर प्रेम से राजी करके लेकर आया जाता है तो यह बहुत ही आसानी से शरीर पर आने लगता है .


अब आप अपने मन को पूरे शरीर में बहुत ही सहजता से विचरण कराये .
ऐसा करने के दौरान आप के शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन होना शुरू हो जायेंगे .


आप को बहुत ही साफ़ साफ़ महसूस होने लगेगा की अब तक आप ने जो कुछ भी अच्छे बुरे कर्म किये है वे अब एक एक करके आप के सामने प्रकट होने लगेंगे .


क्यों की अभी आप सच्ची श्रद्धा से यह अभ्यास कर रहे है इसलिए आप का मन इस अभ्यास के दौरान परमात्मा से सीधा आप की आत्मा के माध्यम से शक्ति से युक्त है . अर्थात अभी आप का मन एक टोर्च की तरह कार्य कर रहा है .


इसलिए जब आप इस आत्मा रुपी टोर्च को पूरे शरीर में घुमा रहे है तो आप के शरीर में जहाँ जहाँ अवरोध (जैसे बुराइयाँ, निंदा , डर, कार्बन , कोई गाठ , कोई दुःख , कोई शंका इत्यादि) है वह अब पिघलने लगता है .


इससे आप का शरीर रूपांतरित होने लगता है . आप के बदलते शरीर को देखकर कई आप के हितेषी आप को डराने लगेंगे .


आप को किसी की भी बात पर ध्यान नहीं देना है . क्यों की जिस प्रकार से आप के शरीर में कई प्रकार के अवरोध जमा है ठीक इसी प्रकार से बाहर इस संसार में भी आप के लिए कई प्रकार के अवरोध जमा है . और बाहर के इन लोगों के रूप में या किसी भी अन्य रूप में अवरोध आप ने खुद ने ही किसी न किसी समय पैदा किये है .


इसलिए इन लोगों से यदि आप उलझने वाले सवाल जवाब करेंगे तो आप जीवन में कभी भी अपने आप को आकर्षक नहीं बना पायेंगे.


अब हम अभ्यास में आगे बढ़ते है .


अब अपने मन का ध्यान आज्ञा चक्र पर लेकर आये . आज्ञा चक्र आप की दोनों आँखों के मध्य के क्षेत्र को कहते है . जहाँ आप टीका लगाते है या बिंदी लगाते है .


अब धीरे धीरे आप महसूस करे की कण कण में व्याप्त परमात्मा का प्रकाश आप की इस शरीर रचना में आप के सिर के पीछे वाले भाग से प्रवेश कर रहा है . इस भाग को विज्ञानं की भाषा में मेडुला कहते है .


आप को महसूस होगा की यही प्रकाश संघनित होकर शरीर के रूप में प्रकट हो रहा है .
इस अभ्यास के दौरान सिर से लेकर पाँव तक पूरी रचना मुस्कुरानी चाहिए .


क्यों की जब तक आप खुश होकर अभ्यास नहीं करेंगे तो मेडुला से प्रवेश होने वाली शक्ति ठीक से आप के शरीर में प्रवेश नहीं कर पायेगी .


हम कहते भी है की प्रभु केवल प्रेम के भूखे है .


इसलिए सबसे पहले आप अपने शरीर को प्रेम से स्वीकार करने का अभ्यास करे .
वास्तविक सत्य यह है की परमात्मा की प्रेम तरंगे आप के चारो तरफ हमेशा बह रही है .

और आप इन तरंगो के बीच भौतिक शरीर के रूप में अपना जीवन जी रहे है .
अब आप यह सोच रहे होंगे की इससे आप का शरीर आकर्षक कैसे बनेगा ?
आप की इस शंका का समाधान मेरे इस निचे समझाए जा रहे अभ्यास से होता है :


अभी आप का यह भौतिक शरीर इन्ही प्रेम की तरंगो से निर्मित हुआ है . पर हमारे प्रभु का एक गुण यह भी है की आप उन्हें जिस भी रूप में अहसास करते है वे उसी रूप में प्रकट हो जाते है .
अर्थात यदि आप इन प्रेम तरंगो को एक डरावने स्वप्न की तरह महसूस करेंगे तो फिर धीरे धीरे आप का मन आप को (आप आत्मा) डराने वाले स्वप्न दिखाने लगेगा .


अर्थात आप जैसा इन प्रेम तरंगो को महसूस करते है पहले आप का वैसा ही अदृश्य मन निर्मित होता है . और फिर लगातार आप के अहसास के कारण यही अदृश्य मन दृश्य मन में घनीभूत होने लगता है .


मतलब हम जो पंचमहाभूत नाम सुनते है वह यही है की परमात्मा इन पांच महाभूतों के रूप में प्रकट हो रहे है .


इन्हे भूत इसीलिए कहा जाता है क्यों की इनका रूप स्थायी नहीं रहता है .


अर्थात हमारे शरीर का रूप भी हमेशा स्थायी नहीं रहता है . इसीलिए हमारा शरीर भी एक प्रकार से भूत ही है यदि हम हर पल प्रभु की अनुभूति में नहीं रहते है तो . यह भूत ही माया है .
इसलिए अब आप एकांत में नियमित रूप से सिर से लेकर पाँव तक की आप के इस शरीर की रचना में एकाग्रता का अभ्यास इस प्रकार से करे की आप को जैसा भी आकर्षक शरीर चाहिए वैसा हर समय महसूस करने लग जाए .


आप बिलकुल शंका मुक्त होकर शत प्रतिशत परमात्मा में विश्वास करके यह स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास नियमित रूप से करे .


इससे यह होगा की आप के दृश्य और अदृश्य मन से धीरे धीरे निंदा , चुगली , बुराई , डर और ऐसे सभी प्रकार के नकारात्मक भाव उन नये भावों में रूपांतरित होने लगेंगे जिन भावों को अब आप महसूस करने का अभ्यास करते है .


मतलब ज्याकी रही भावना जैसी
वान मूरत दिखे वैसी


इसका अर्थ यह है की आप अपने शरीर को जैसा भी आकर्षक बनाना चाहते है आप को उसी के अनुसार स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करना अनिवार्य है .


इसमें आप को निम्न शर्तो का पालन करना अनिवार्य है :


आप को अपने मन से इसमें कितना समय लगेगा इस प्रश्न को निकालना होगा . क्यों की यह परिणाम साधक के मन में संचित कर्मो पर निर्भर करता है और साथ ही साधक के आत्मविश्वास पर निर्भर करता है .


इसी अभ्यास से आप को शरीर को आकर्षक बनाने के लिए कैसा भोजन खाना है और क्या क्या नियम अपनाने है इन सभी का ज्ञान होने लगेगा .


धन्यवाद जी . मंगल हो जी .