सबकुछ होते हुए आप दुखी क्यों है ?

ऐसा आप के संचित कर्मो और आत्मा से विमुखता के कारण हो रहा है . अभी आप यह समझ रहे है की यह मेरा नाम है , यह मेरी पत्नी है , मेरा धर्म हिन्दू है , मै एक इंजीनियर हूँ , वह मेरा मित्र है , और वह दूसरा मेरा शत्रु है .

क्यों की आप अभी मन की कार्य प्रणाली को ठीक से समझ नहीं पा रहे है .

और ऐसा आप के संचित कर्मो और आत्मा से विमुखता के कारण हो रहा है . अभी आप यह समझ रहे है की यह मेरा नाम है , यह मेरी पत्नी है , मेरा धर्म हिन्दू है , मै एक इंजीनियर हूँ , वह मेरा मित्र है , और वह दूसरा मेरा शत्रु है .

आप अभी अपने आप को हाड़मांस का शरीर मान रहे है .

मै यह बात संसार के सभी लोगों के लिए नहीं कह रहा हूँ . जिसने वास्तविक रूप में खुद को जान लिया है मै आप को उस व्यक्ति के लक्षण बता रहा हूँ :

आत्मज्ञानी यदि अभी भौतिक शरीर के रूप में इस माँ धरती पर है तो वह अभी उन सभी आत्माओं को इस संसारी माया जाल से निकालने में जुटा हुआ है .

ऐसा आत्मज्ञानी इंसान बिना पद , लोभ , लालच , सम्मान और धन की चाह त्याग कर जीवों की सेवा में लगा हुआ है .

यह संसार एक स्वप्न है . पर आप इस स्वप्न को सच समझ बैठे है . इसलिए आप की आत्मा मंझे के गुच्छों की तरह कर्मो के जाल में फस गयी है .

इसलिए आप अभी इसी समय सम्पूर्ण इच्छा मुक्त नहीं हो सकते है . क्यों की आप जो रोज भोजन ग्रहण कर रहे है तथा आप जैसा भी अभी जीवन जी रहे है वह लगभग नब्बे प्रतिशत प्रारब्ध के अनुसार आप से आप के कर्म ही करवा रहे है .

जब आप स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करते है तो यही कर्म आप जाग्रत होकर करने लगते है .

इसे मै आप को निम्न उदाहरण से समझाता हूँ :

जैसे आप किसी को उसके भले के लिए बात समझा रहे है और वह आप की बात नहीं समझ रहा है . बल्कि आप के समझाने पर उल्टा आप से लड़ाई झगड़ा करने लगता है . तो आप यही तो सोचते है की मेरे साथ ऐसा अन्याय क्यों हो रहा है ?

अब मै आप को इसका वास्तविक सच समझा रहा हूँ :

जैसे आप को उर्दू भाषा नहीं आती है और आप को कोई व्यक्ति उर्दू भाषा में आप के भले के लिए कुछ बात समझाने का बार बार प्रयास कर रहा है .

तो आप क्या करेंगे ?

आप ऐसे व्यक्ति से परेशान हो जायेंगे . और ऐसा व्यक्ति आप से परेशान हो जायेगा . क्यों की वह आप को आप के भले के लिए समझा रहा है और आप उसे ही लड़ रहे है .

तो ऐसा व्यक्ति भी आप ही की तरह सोचता है .

अब आप समझ गए होंगे की इस पूरे संसार में ऐसा ही हो रहा है . कोई तेज डीजे चलाकर सड़क पर नाच रहा है और कोई इस डीजे से परेशान होकर बहरा हो रहा है . इसलिए अब नाचने वाले और बहरे होने वाले में झगड़ा हो रहा है .

आप सभी के साथ ऐसा क्यों हो रहा है ?

क्यों की अभी हमे मान , सम्मान , पद , प्रतिष्ठा , धन , विजय इत्यादि चाहिए . हम चाहते है की कोई हमारा सम्मान करे , कोई हमारे पद का सम्मान करे , कोई हमसे सीखे.

आप कभी एकांत में बैठकर सोचना की यदि आप देश के एक बहुत ही बड़े पद पर है . और आप हमेशा सुरक्षा के घेरे में रहते है .

तो क्या आप का कभी मन नहीं करता है की एक सामान्य इंसान की तरह आप भी जहाँ चाहे वहाँ स्वतंत्र होकर घूम सके , विश्राम कर सके, कोई खेल खेल सके .

अवश्य करता है .

पर आप इस इच्छा को अपने विभिन्न प्रकार के डरो के कारण दबा देते है . और इसी प्रकार के डरो के कारण आप सबकुछ होते हुए दुखी रहते है .

आप ने कभी सोचा है की जब दो व्यक्ति खेलते है तो उनमे बड़ा कौन होता है . लगभग पूरी दुनिया यह कहेगी की जो जीतता है वह बड़ा होता है .

पर वास्तविक सच यह है की दोनों बड़े होते है . दोनों बराबर महान होते है . क्यों की जब एक हार स्वीकार करता है तभी दूसरा विजय हो पाता है.

क्यों की हारने वाले और जीतने वाले दोनों के रूप में हमारे प्यारे प्रभु ही है .

एक आत्मज्ञानी कहता है की मेरी हार मे भी तू ही है और मेरी जीत में भी तू ही है . मै तो हूँ ही नहीं कही .

अर्थात मेरे और आप दोनों के रूप में हमारे प्यारे प्रभु ही यह लीला रच रहे है .

इसलिए हम दोनों कैसे एक दूसरे के शत्रु हो सकते है .

अब आप सोच रहे होंगे की फिर संसार में इतनी मारकाट और लड़ाई झगड़े क्यों होते है . क्यों की अभी आप के पास जो कुछ भी मौजूद है आप उस पर अपने मन का ध्यान नहीं लगा रहे है .

अभी आप जो कुछ भी दिखाई दे रहा है उसके पीछे भाग रहे है .

जैसे आप से किसी ने कहा की नरेंद्र मोदी महान है और राहुल गाँधी महान नहीं है . और फिर आप ने भी हाँ मिलादि. अब यदि आप के पास में कोई ऐसा इंसान बैठा है जिसके लिए राहुल गाँधी महान है . तो अवश्य ही आप दोनों खुद को सही साबित करने के लिए एक दूसरे से तर्क वितर्क करेंगे .

अब आप दोनों तो तर्क वितर्क करते करते दुखी हो जाऐंगे. और आप के लिए जो स्वादिष्ट भोजन आया है उसे कोई और इंसान खाकर खुश हो जायेगा .

आप ने बहस में पढ़ने से पहले एक बार भी यह नहीं सोचा की आप नरेंद्र मोदी से कितनी बार मिले हो और सामने वाला इंसान राहुल गाँधी से कितनी बार मिला है . शायद एक बार भी नहीं. और मिले भी होंगे तो हम एक बार मे किसी इंसान के बारे मे पूरा सच नहीं जान सकते है . क्यों अभी हम खुद के बारे मे ही बहुत कम जानते है .

मतलब हमे जिस विषय के बारे में abcd तक पता नहीं है पर हम बात पीएचडी की करते है .

इसीलिए तो कबीर ने कहा है की :

बुरा जो देखन मै चला बुरा न मिलया कोई

जो खोजू भीतरी मुझसे बुरा न कोई |

अर्थात इस संसार मेरे से ज्यादा बुरा और मेरे से ज्यादा अच्छा कोई दूसरा इंसान नहीं है यदि मै खुद को जान लेता हूँ तो . हमारे भावों मै सुख दुःख प्रकट होते है . जो बार बार अभ्यास के कारण दृश्य जगत का रूप ले लेते है .

मतलब पूरा संसार आप ही के कर्मो का फल है .

जैसे आप अपने आप को एक महान ज्ञानी और धनि इंसान समझते है . और आप का समय बहुत कीमती है . तथा आप एक बहुत जरुरी मीटिंग के लिए विदेश जा रहे है . अब घर से निकलते ही आप को एक भिखारी रोक लेता है और आप से भीख मांगता है .

अब आप उसे २ रुपय देने की कोशिश करते है और वह २ रुपय लेने से मना कर देता है .

अब आप को इस भिखारी पर क्रोध आ जाता है और आप उसे तेज आवाज मै डाँटकर अपनी गाड़ी मै बैठ जाते है .

इस समय आप का मन अशांत हो जाता है . ठीक इसी प्रकार की अन्य घटनाओं से आप दुखी रहते है .

अब आप यह सोच रहे होंगे की इसमें आप की गलती क्या है ?

अब मै आप को बताता हूँ की इसमें आप की गलती यह है की जिस मीटिंग का आप स्वप्न देख रहे है पता नहीं वह कब होगी पर हमारे प्रभु तो एक भिखारी के रूप मे आकर आप को जाग्रत करने आये थे की मीटिंग मे आप को क्या क्या बोलना है और क्या क्या नहीं .

क्यों की मन का शांत होना ही हमारे प्रभु की उपस्थिति है . और शांत मन मे ही ज्ञान की फसल पैदा होती है . इसलिए हमे भिखारी का भी उतना ही सम्मान करना है जितना एक बड़े अधिकारी का .

आप को सिर्फ स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करना है . जिससे आप एक भिखारी को प्यार से ज्यादा पैसे देने से मना करके आप अपनी गाड़ी मे बैठ सकते है .

अर्थात हमे समर्पण भाव को विकसित करना है . और ऐसा आप स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से आसानी से कर सकते है .

तब धीरे धीरे आप को इस बात का अहसास होगा की सबकुछ होते हुए भी आप दुखी क्यों रहते है .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .