लिंग को टाइट कैसे करे ?

मेरे बहुत ही प्रिये मित्रों आज हमारे प्रभु हमे उस विज्ञानं के बारे में समझा रहे है जिसके बारे में आज के समय में एक छोटे बच्चे से लेकर एक बूढ़े व्यक्ति तक जानना चाहते है .

मेरे बहुत ही प्रिये मित्रों आज हमारे प्रभु हमे उस विज्ञानं के बारे में समझा रहे है जिसके बारे में आज के समय में एक छोटे बच्चे से लेकर एक बूढ़े व्यक्ति तक जानना चाहते है .

जब हमारा मन पागलपन की सारी हदे पार कर देता है तब हमारे मन में ऐसे ही विचार पनपने लगते है .

जब कोई भी इंसान अपनी इच्छाओं का इतना ज्यादा गुलाम हो जाता है की उसने अपने पिता (प्रभु) से जो वादा किया है उसे भूलकर खुद ही को पिता समझ बैठता है तो फिर भगवान की यही माया अपना तांडव इस कदर करने लगती है की हम एक पशु और इंसान में फर्क नहीं कर पाते है .

जब आप स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करते है तो आप को पता चलने लगता है की आप का मन परमात्मा की शक्ति से निर्मित होता है और आप को यह महसूस होने लगता है की आप परमपिता के ही अंश है .

अर्थात आप सर्वव्यापी आत्मा है . और आप के पास इस आत्मा के रूप में वह सारा ज्ञान है जिसके माध्यम से आप एक मन का सृजन कर सकते है और फिर इसी मन के माध्यम से आप पूरी दुनिया का सृजन कर सकते है .

जब आप को यह ज्ञान हो जाता है की आप के हाथ  में एक बहुत बढ़ी शक्ति आ चुकी है . तो इसी में एक भूलने वाला और दूसरा याद दिलाने वाला ज्ञान भी छिपा होता है .

शायद आप को मालूम हो की जब एक चोर चोरी करता है तो कम से कम एक बार उसकी आत्मा उसको मना अवश्य करती है की तू यह गलत काम मत कर . इसका का परिणाम तुझे ही भुगतना पड़ेगा .

ठीक इसी प्रकार जब आप के परमात्मा से एक बढ़ी शक्ति हाथ लग जाती है तो अब यह आप की परमपिता में सच्ची श्रद्धा पर निर्भर करता है की अब भी आप इस शक्ति को प्रभु से प्राप्त की गयी मानते हो या नहीं .

अब यदि आप की प्रभु में श्रद्धा कमजोर है तो आप इस शक्ति में जो भूलने वाला ज्ञान है उसकी गिरफ्त में आ जायेंगे . और फिर आप को यह महसूस होने लगेगा की सबकुछ आप ही कर रहे है . प्रभु के इस भूलने वाले ज्ञान को माया कहते है .

अर्थात अब आप माया के वश में पूरी तरह से आ चुके होते है . इसलिए अब आप को माया जैसे नचाएगी वैसे ही नाचना पड़ेगा .

इसलिए अब आप के निर्मित हो रहे इस मन में कामुकता , यौन क्रियाओं से सम्बंधित विचार बहुत ज्यादा मात्रा में प्रकट होने लगेंगे . अर्थात आप आत्मा खुद माया के वश में होकर गन्दी यौन क्रीड़ाओं , अश्लील दृश्यों , कई प्रकार की वासनाओं में इस कदर घिर जाओगे की वहाँ से निकलना आप के लिए बहुत मुश्किल हो जायेगा .

और यही से आप के भीतर एक नये अहंकार का जन्म होगा . अब आप को ऐसे लोग ही मिलेंगे जो आप को समझायेंगे की लिंग को टाइट करो और अपनी यौन इच्छाओ को बहुत ख़ुशी से पूरा करो .

पर जब आप स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करते है तो आप को यह महसूस होने लगता है की ये यौन इच्छाएँ कभी न पूरी होने वाली एक धोखेबाज मित्र है .

पर सभी लोगों के लिए यह अहसास होना इतना आसान नहीं है .

इस जाग्रत अहसास को महसूस करने में किसी व्यक्ति को एक महीना लग सकता है तो किसी को कई जन्म भी लग सकते है .

क्यों की यदि आप किसी इंसान को देख रहे है तो यह आवश्यक नहीं है की वह सच में इंसान ही हो . यदि उसके कर्म एक पशु की तरह है तो वह वास्तविक रूप में पशु ही है .

और वैसे भी हमने जो वेद शास्त्रों में पढ़ा है की हम चौरासी लाख योनियों में ही भटकते रहते है . तो यह तथ्य सही भी है . क्यों की आज के समय में आप खुद देख रहे है की कैसे एक बहुत ही पढ़ा लिखा शिक्षित व्यक्ति एक छोटी बच्ची के साथ बलात्कार कर बैठता है . और बाद में उसे इतनी शर्मिंदगी महसूस होती है की कई बार तो ऐसे व्यक्ति के माता पिता भी उसको पुत्र मानने से इंकार कर देते है .

ठीक यही बात महिलाओं पर भी लागू होती है .

जैसे कई महिलाए कानून का डर दिखाकर कई सीधे साधे पुरुषों को झूठे मामलों में फसा देती है .

और यह सब इन दोनों प्रकार के इंसानो के संचित कर्मो के कारण होता है .

अब आप यह सोच रहे होंगे की 'लिंग को टाइट कैसे करे?' इस प्रश्न का इस उपरोक्त ज्ञान से क्या सम्बन्ध है ?.

अब मै आप को स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से समझाने जा रहा हूँ :

यदि अब आप को यह अहसास हो गया है की आप का यह मनुष्य जन्म बहुत ही अनमोल है और आप के जीवन का लक्ष्य सच्ची ख़ुशी को प्राप्त करना है .

मतलब आप खुद का दर्शन करना चाहते है और यह अहसाह करना चाहते है की आप खुद कुछ नहीं कर रहे है बल्कि आप के माध्यम से हमारे सर्वव्यापी पिता ही ये सब खेल खेल रहे है तो फिर आप अपने मन को प्रभु की सेवा में लगाए .

अर्थात आप को सबसे पहले खुद की सेवा करनी है .

कैसे ?

सही लोगों की संगत करे .

उचित व्यायाम करे .

संतुलित भोजन करे .

संतुलित नींद ले .

हमेशा सेवा कार्यो में अपने को व्यस्थ रखे .

सभी जीवों को निश्वार्थ प्रेम करने का अभ्यास करे .

जो आप को परेशान करे उसको भीतर से ज्यादा प्रेम करे .

शिकायत मुक्त जीवन जीने का अभ्यास करे .

आप पहले ये उपरोक्त स्वरुप दर्शन क्रियाओं का सच्चे दिल से अभ्यास करे .

हमारे प्रभु इतने दयालु है की चाहे आप ने कितने भी पाप कर्म किये हो वे आप को सबसे सही रास्ता दिखा देंगे .

यदि आप को किसी चिकित्सा की आवश्यकता होगी तो वे खुद एक चिकित्सक बनकर आपका इलाज करने आ जायेंगे .

और यदि आप को किसी अन्य उपाय की आवश्यकता होगी तो भी हमारे प्रभु इसे शत प्रतिशत आप के लिए कर देंगे .

बस आप अपने मन में यह विश्वास रखे की स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से मै शत प्रतिशत ठीक हो जाऊंगा .

अपने मन से हीन भावना के सभी विचारों को स्वरूप दर्शन क्रिया के अभ्यास से सृजन कारी विचारों से प्रतिस्थापि करदे . अर्थात किसी भी अश्लील विचार का दमन नहीं करे .

बल्कि हर एक विचार को पूरी जाग्रति के साथ देखे .

ऐसा अभ्यास करने से आप को खुद को पता चल जायेगा की आप का जन्म मानव से महामानव बनने के लिए हुआ है . न की वापस निम्न योनियों में जन्म लेने के लिए .

याद रखना एक बार यदि आप निम्न योनि में गिर गए तो वापस वहाँ से मनुष्य योनि में जन्म लेना बहुत ही कठीन है.

और लिंग को टाइट करने के लिए जो चिकित्सा होती है वह मन की चिकित्सा होती है . न की लिंग के साथ छेड़छाड़ करने की .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .