क्यों शब्दों का खेल असली दिमाग़ का खेल होता है?

हँसी की दुनिया विशाल है— कोई जोक सुनाता है, कोई मिमिक्री करता है, कोई व्यंग्य से खेलता है…

क्यों शब्दों का खेल असली दिमाग़ का खेल होता है?
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