क्या सेक्स न करने से जल्द हो जाती है मेनोपॉज की समस्या ?
01 Jan, 2026
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महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई विषय आज भी समाज में गलत धारणाओं और अधूरी जानकारी से घिरे हुए हैं। इन्हीं में से एक विषय है यौन सक्रियता और मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बीच संबंध। हाल के वर्षों में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण शोध में यह सामने आया है कि जो महिलाएं नियमित रूप से यौन संबंध बनाती हैं, उनमें पीरियड्स बंद होने यानी मेनोपॉज की संभावना अपेक्षाकृत कम पाई गई है। यह अध्ययन महिलाओं के शरीर विज्ञान, प्रजनन क्षमता और हार्मोनल संतुलन को समझने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
शोध के अनुसार, जो महिलाएं सप्ताह में कम से कम एक बार संभोग करती हैं, उनमें मेनोपॉज की संभावना उन महिलाओं की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत कम पाई गई, जो महीने में केवल एक बार या उससे भी कम बार यौन संबंध बनाती हैं। इस अध्ययन में यह भी संकेत मिला कि यौन सक्रियता शरीर को यह संकेत दे सकती है कि गर्भधारण की संभावना अभी बनी हुई है, जिससे शरीर प्रजनन से जुड़ी प्रक्रियाओं को लंबे समय तक जारी रखता है।
अध्ययन में विशेष रूप से 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं (मिड लाइफ) पर ध्यान केंद्रित किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो महिलाएं इस आयु वर्ग में नियमित रूप से संभोग नहीं करती हैं, उनमें अपेक्षाकृत कम उम्र में मेनोपॉज शुरू होने की संभावना अधिक होती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि यौन सक्रियता ही मेनोपॉज को पूरी तरह रोक सकती है, बल्कि यह एक सहायक जैविक कारक के रूप में कार्य कर सकती है।
इस शोध का नेतृत्व यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन की शोधकर्ता मेगन अर्नोट ने किया। उन्होंने कहा,
“अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि यदि कोई महिला यौन संबंध नहीं बना रही है और गर्भधारण की कोई संभावना नहीं है, तो शरीर के लिए अंडोत्सर्ग जारी रखना जैविक रूप से व्यर्थ हो सकता है। ऐसे में शरीर धीरे-धीरे अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) की प्रक्रिया को बंद करने लगता है।”
उनके अनुसार, मानव शरीर ऊर्जा और संसाधनों का उपयोग प्राथमिकताओं के आधार पर करता है। जब प्रजनन की संभावना कम हो जाती है, तो शरीर अन्य जैविक प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करता है।
अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अंडोत्सर्ग के दौरान महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती है। इस दौरान शरीर गर्भधारण के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है, जिससे संक्रमण या बीमारी की संभावना थोड़ी बढ़ सकती है। यदि गर्भधारण की कोई वास्तविक संभावना नहीं है, तो शरीर के लिए इस जोखिम को उठाना आवश्यक नहीं माना जाता। यही कारण है कि लंबे समय तक यौन निष्क्रियता शरीर को अंडोत्सर्ग रोकने का संकेत दे सकती है।
यह शोध SWAN (Study of Women’s Health Across the Nation) नामक दीर्घकालिक अध्ययन के अंतर्गत किया गया, जिसमें 2,936 महिलाओं से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। ये आंकड़े वर्ष 1996–1997 के दौरान एकत्र किए गए थे। महिलाओं से उनके स्वास्थ्य, जीवनशैली और यौन गतिविधियों से जुड़े कई प्रश्न पूछे गए।
महिलाओं से यह भी पूछा गया कि पिछले छह महीनों में उन्होंने अपने साथी के साथ संभोग किया है या नहीं। इसके अतिरिक्त, कामोत्तेजना और यौन गतिविधियों के अन्य रूपों से जुड़े प्रश्न भी शामिल किए गए, जैसे यौन स्पर्श, मुख मैथुन और आत्म-उत्तेजना या हस्तमैथुन।
अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि यौन गतिविधियों में भाग लेने के सबसे अधिक उत्तर साप्ताहिक (लगभग 64 प्रतिशत) थे। इसके बाद मासिक और उससे कम आवृत्ति वाले उत्तर सामने आए। दस वर्षों की अनुवर्ती अवधि (follow-up) में यह देखा गया कि कुल 2,936 महिलाओं में से 1,324 महिलाओं ने औसतन 52 वर्ष की उम्र में प्राकृतिक मेनोपॉज का अनुभव किया।
मेनोपॉज वह अवस्था है जब महिलाओं का मासिक धर्म चक्र स्थायी रूप से बंद हो जाता है। आमतौर पर इसे महिला की प्रजनन क्षमता के अंत के रूप में देखा जाता है। मेनोपॉज के साथ हार्मोनल बदलाव, हॉट फ्लैश, मूड स्विंग्स, नींद की समस्या और हड्डियों की मजबूती में कमी जैसी कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तन जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि इस अध्ययन में यौन सक्रियता और मेनोपॉज की उम्र के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है, लेकिन इसके सटीक जैविक कारणों पर अभी और शोध की आवश्यकता है। जर्नल रॉयल सोसायटी ओपन साइंस में प्रकाशित इस रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि यह संबंध कारण-परिणाम (cause-effect) की पुष्टि नहीं करता, बल्कि एक मजबूत सहसंबंध (correlation) को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अध्ययन महिलाओं के यौन स्वास्थ्य को लेकर खुली और वैज्ञानिक चर्चा को बढ़ावा देते हैं। लंबे समय तक महिलाओं की यौन सक्रियता को सामाजिक वर्जनाओं से जोड़कर देखा गया है, जबकि यह भी समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह शोध यह संकेत देता है कि महिलाओं की यौन सक्रियता केवल मानसिक या भावनात्मक पहलू तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव शरीर की जैविक प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि मेनोपॉज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और हर महिला के लिए इसका समय अलग-अलग हो सकता है, फिर भी यह अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि जीवनशैली के कुछ कारक इसे प्रभावित कर सकते हैं।
अंततः, विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य, शरीर और जीवनशैली से जुड़े निर्णय जानकारी और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर लेने चाहिए, न कि सामाजिक मिथकों या गलत धारणाओं के आधार पर।
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