भांग को सदियों से एक औषधि और पवित्र पौधे के रूप में देखा गया है। अब, आधुनिक विज्ञान भी मानने लगा है कि यह पौधा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में दर्द कम करने, भूख बढ़ाने, और शायद कुछ हद तक कैंसर की बढ़ोतरी को रोकने में मददगार हो सकता है।
कैंसर मरीजों के लिए भांग की सच्चाई – अब साफ-साफ बात करें
प्रकृति में हर चीज़ एक दवा भी हो सकती है और ज़हर भी – यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कब, कैसे और कितनी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। यही बात भांग (Marijuana / Cannabis) पर भी लागू होती है।
भांग एक ऐसा पौधा है जिसे इंसान हजारों सालों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं – कभी दवा के रूप में, कभी पूजा में, तो कभी कपड़े, रस्सी और तेल बनाने के लिए। लेकिन अब, यह पौधा फिर से चर्चा में है — खासकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में इसके इस्तेमाल को लेकर।
आज हम जानते हैं कि भांग का सही तरीके से इस्तेमाल कैंसर के मरीजों को राहत दे सकता है। कुछ रिसर्च तो यह भी बताते हैं कि इसके कुछ तत्व कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोक सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे:
कैंसर मरीजों की ज़िंदगी में सुधार
कैंसर का इलाज जितना मुश्किल होता है, उससे ज़्यादा मुश्किल होता है उसका दर्द सहना। लेकिन भांग से बने दवाएं या तेल (जिन्हें Cannabinoids कहा जाता है), शरीर और दिमाग दोनों को राहत देने में मदद कर सकते हैं।
फायदे:
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भूख बढ़ाना
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जी मिचलाना (nausea) कम करना
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उल्टी रोकना
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दर्द में राहत
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चिंता और तनाव को कम करना
ये सारी चीज़ें मिलकर कैंसर मरीज की जिंदगी को थोड़ा आसान बना देती हैं। जब मरीज अच्छा खाएगा, आराम करेगा और मानसिक रूप से शांत रहेगा — तो इलाज का असर भी बेहतर होगा।
कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स से राहत
कीमोथेरेपी बहुत ताकतवर और ज़हरीली दवा होती है। इसके साइड इफेक्ट्स में सबसे आम हैं:
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भूख न लगना
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मितली आना और उल्टी
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थकावट और नींद की कमी
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शरीर का वजन तेजी से कम होना (Cachexia)
Cannabis यानी भांग इन लक्षणों से राहत देने में मदद करता है। इसकी वजह से मरीज को भूख लगती है (जिसे आम भाषा में munchies कहा जाता है), स्वाद लौटता है और मरीज बेहतर खा पाता है। रिसर्च में यह भी पाया गया है कि THC नामक तत्व शरीर के दुबलेपन को रोकने में भी मदद करता है।
क्या भांग कैंसर को रोक सकता है?
यह सबसे दिलचस्प बात है। कुछ शुरुआती रिसर्च यह बताती हैं कि Cannabis के कुछ तत्व कैंसर की ग्रोथ को रोक सकते हैं, और कुछ मामलों में तो उसे वापस कमज़ोर भी कर सकते हैं।
उदाहरण:
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2007 की एक स्टडी में पाया गया कि CBD नामक तत्व ब्रेस्ट कैंसर के लिए असरदार हो सकता है।
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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में THC ने फेफड़ों के कैंसर की ग्रोथ 50% तक धीमी कर दी।
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एक और स्टडी में देखा गया कि ब्रेन ट्यूमर वाले मरीजों में, जिन पर कीमो असर नहीं कर रही थी, वहाँ भांग से फायदा मिला।
भांग: प्रकृति का तोहफा
भांग कोई केमिकल नहीं, एक प्राकृतिक पौधा है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके साइड इफेक्ट्स आमतौर पर बहुत कम होते हैं और यह शरीर को अन्य दवाओं जितना नुकसान नहीं पहुंचाता।
लेकिन कुछ सावधानियाँ ज़रूरी हैं
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THC कुछ लोगों में चक्कर, डर, नींद या मूड स्विंग जैसी समस्याएं ला सकता है — खासकर उन लोगों में जो पहली बार इसे इस्तेमाल करते हैं।
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स्मोकिंग (धूम्रपान) से भले ही राहत जल्दी मिलती है, लेकिन फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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भांग के कुछ तत्वों से पुरुषों में टेस्टीक्यूलर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है अगर इसे लम्बे समय तक अत्यधिक मात्रा में इस्तेमाल किया जाए।
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हर तरह के कैंसर के लिए एक ही तरह का भांग का तत्व काम नहीं करता। इसलिए सेल्फ-मेडिकेशन करना खतरनाक हो सकता है।
क्या करना चाहिए?
अगर आप या आपका कोई जानने वाला कैंसर से जूझ रहा है और भांग को उपचार में शामिल करना चाहता है, तो सबसे बेहतर होगा कि आप किसी अनुभवी डॉक्टर या हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह लें जो इसके बारे में नई रिसर्च और डोज़िंग को अच्छी तरह समझता हो।
निष्कर्ष: भांग कोई चमत्कार नहीं, लेकिन सहारा ज़रूर है
भांग को सदियों से एक औषधि और पवित्र पौधे के रूप में देखा गया है। अब, आधुनिक विज्ञान भी मानने लगा है कि यह पौधा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में दर्द कम करने, भूख बढ़ाने, और शायद कुछ हद तक कैंसर की बढ़ोतरी को रोकने में मददगार हो सकता है।
हालांकि रिसर्च अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में यह प्राचीन पौधा आधुनिक इलाज का एक भरोसेमंद हिस्सा बन सकता है।
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