हमारी जीवन शैली कैसी होनी चाहिए ?

एक आदर्श जीवन शैली के गुण . एक आदर्श जीवन शैली को आप खुद कैसे खुद के लिए विकसित कर सकते है ?.

हमारी जीवन शैली कैसी होनी चाहिए ?

मेरे प्रिय मित्रों आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे है जिसकी जरुरत हम सभी को है .

आज का हमारा विषय है : जीवन शैली

जैसा की उपरोक्त शब्द में ही इसका अर्थ छिपा हुआ है .  जीवन शैली का अर्थ है जीवन को जीने का ढंग .

मतलब हम हमारा जीवन किस प्रकार जी रहे है ?


  • क्या हम जीवन को सिर्फ काट रहे है
  • या हम जीवन को ठीक से जी रहे है
  • या हमे अभी समझ में ही नहीं आ रहा है की हम कैसा जीवन जी रहे है
  • या हम जीवन से परेशान हो चुके है
  • या हम उच्च कोटि का जीवन जी रहे है
  • या हम रहीश जीवन जी रहे है
  • या हम गरीबी में अपने दिन गुजार रहे है
  • या हम भविष्य की कल्पनाओं में जी रहे है
  • या हम हमारे जीवन को पूर्ण संतुष्टि से जी रहे है
  • या हम जीवन को रचनात्मक ढंग से जी रहे है 


मित्रों ये उपरोक्त जीवन जीने के तरीके व्यक्तिगत है .

क्यों की हमे प्रभु ने वह सब कुछ दिया है जिससे हम हमारे जीवन को जैसा जीना चाहे वैसा जी सकते है .

एक आदर्श जीवन शैली निम्न गुण रखती है :


  • इसमें हमेशा शुभ अवसरों की भरमार रहती है
  • यह शिकायत मुक्त रहती है
  • यह खुद को और दुसरो को सुख पहुंचाने  वाली होती है
  • यह स्वस्थ और फुर्तीली होती है
  • यह समस्या आने पर उसका सही समाधान  भी साथ रखती है
  • ऐसी जीवन शैली में धैर्य अनंत होता है
  • ऐसी जीवन शैली आपको आप का दर्शन कराती है
  • यह पूर्ण शंका मुक्त होती है
  • इसमें आपको आप का लक्ष्य साफ़ साफ़ दिखाई देता है


एक आदर्श जीवन शैली को आप खुद कैसे खुद के लिए विकसित कर सकते है ?

मित्रों इसके लिए आप को सच्ची श्रद्धा और पूर्ण विश्वास के साथ स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करना अनिवार्य होता है .

जब आप खुद के लिए रोज थोड़ा थोड़ा एकांत में समय निकालने की कोशिश करते है .

और फिर रोज आप कुछ समय अकेले में खुद के साथ बैठते है तो आप के साथ चमत्कार होना शुरू हो जाते है .

अकेले में बैठने से आप को पता चलने लगता है की आप की जीवन शैली किस प्रकार की है .


  • आप यह जानने लगते है की अभी आप जीवन में किस दिशा की तरफ बढ़ रहे है .
  • पहली बार अकेले में बैठने से आप का खुद से सामना होने लगता है .
  • और धीरे धीरे आप के मन से सभी प्रकार के डर ख़ुशी में बदलने लगते है .
  • अब आप को जीवन को जीने के लिए एक नया ज्ञान हमारे प्रभु से सीधे मिलने लगता है .


जब आप अकेले में प्रभु से बात करते है तो आप को यह पता चलने लगता है की आप का जन्म इस धरती पर क्यों हुआ है ?.

अब आप को अपने जीवन की कीमत समझ में आने लगती है .

जब आप सिर से लेकर पाँव तक में एकाग्रता का अभ्यास करना शुरू करते है तो आप के मन और शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन होना शुरू हो जाते है .

इस प्रकार से स्वरुप दर्शन क्रिया करने से आप को पता चलने लगता है की आप के जीवन मे यदि परेशानिया आ रही है तो इन परेशानियों का मुख्य कारण कहा छिपा हुआ है .

एक आदर्श जीवन शैली को प्राप्त करने के लिए हमे सबसे पहले खुद को पूर्ण रूप से स्वीकार करना अनिवार्य होता है .

जब हम जैसे है वैसे ही खुद को स्वीकार करने लगते है तो हमारे मन में अनंत जन्मों से संचित कर्म एक एक करके मानस पटल पर बाहर आने लगते है .

जैसे हम इसे एक उदाहरण से समझते है :

एक व्यक्ति नशे की आदत से बहुत परेशान है . और वह चाहता है की कैसे भी करके उसका नशा छूट  जाए तो वह भी एक आदर्श जीवन जी सकता है .

और इसके लिए वह बहुत सारा पैसा भी खर्च कर सकता है .

ऐसा इंसान स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से अपने वर्तमान जीवन को शत प्रतिशत एक आदर्श जीवन में निम्न प्रकार से रचनात्मक प्रयोग करके रूपांतरित कर सकता है :

सबसे पहले ऐसे इंसान को चाहिए की उसे हमारे प्रभु का बार बार धन्यवाद करना चाहिए की आज वह उसके पुराने अच्छे कर्मो की वजह से स्वरुप दर्शन क्रिया योग से जुड़ने का अवसर प्राप्त कर पाया है .

क्यों की इस संसार में जितना भी धन धन्य है वह सब हमारे प्रभु का ही है . हम खुद प्रभु के बहुत ही प्यारे बच्चे है .

यदि हमे सुबह उठकर व्यायाम करने में बहुत आलस आता है तो हमे यह समझना चाहिए की जब हमारी तबियत खराब होती है तो हम खुद के साथ साथ घर और बाहर के न जाने कितने लोगों पर बोझ बन जाते है .

आप खुद यह जानते हो की यदि आप के पास कोई रोज रोज रोता हुआ आये तो आप को कैसे लगेगा ?

आप को अच्छा नहीं लगेगा और आप ऐसे इंसान से जल्दी से पीछा छुड़ाना चाहेंगे .

इसलिए जब भी अच्छा काम करने के समय आलस आये तो आप तुरंत यह याद करे की पिछली बार जब आप ने आलस किया था तो आप को चार दिन अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था और आप को शरीर में कई प्रकार की पीड़ाओं का सामना करना पड़ा था .

और साथ ही यह भी याद करे की आप का पैसा भी बहुत सारा खर्च हो गया था .

और आप के मुँह का स्वाद भी चला गया था .

ठीक इसी प्रकार से जब आप गर्मी के दिनों में जब सूर्य आग उगल रहा होता है और आप पैदल ही किसी रास्ते से अपने घर जा रहे होते है . तो आप को बहुत तेज धुप सताती है .

उस समय यदि आप को एक बहुत ही घने पेड़ की छाया का आसरा मिल जाता है तो आप को बहुत ही ज्यादा ख़ुशी मिलती है .

तब क्या आप उस पेड़ को पूरे ह्रदय से धन्यवाद देते है ?

शायद नहीं .

आप उस तेज धुप को तुरंत भूलकर अपने नए काम या पुरानी चिंता में डूब जाते है . और आप यह भूल जाते है की हमारे परम पिता को आप को तेज धुप में देखकर दया आ गयी और वे पेड़ के रूप में छाया बनकर आप के लिए खड़े हो गए .

और अब आप हमारे प्रभु को ही भूल गए .

इसलिए जब आप स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करते है तो आप को प्रकृति की हर एक चीज की कीमत का पता चलने लगता है .

और इस अभ्यास से आप धीरे धीरे वर्तमान में जीने लगते है .

स्वरुप दर्शन क्रिया योग के अभ्यास से आप का जीवन चक्र प्राकृतिक होने लगता है .

अब आप को शत्रु से भी प्रेम होने लगता है .

अब आप को परिवार वाले भी अच्छे लगने लगते है .

आप का तुलना करने वाला मन रचनात्मकता में रूपांतरित होने लगता है .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .