गुप्त रोगों का जड़ से इलाज

यह खुजली हमारे शरीर के भीतर जो अनावश्यक तत्व मौजूद है उन्हें बाहर निकालने के कारण होती है . अर्थात खुजली का महसूस होना ही शरीर शुद्धिकरण की प्रक्रिया का एक हिस्सा है . ध्यान रहे शरीर निर्माण में भी खुजली का महसूस होना एक आम बात है .

मेरे प्रिये मित्रों आज हम गुप्त रोगों के कारण और स्थायी समाधान पर बात कर रहे है . जिस प्रकार से हमारे शरीर में एक फोड़ा हो जाता है और पकने से पहले इसमें मीठी मीठी खुजली चलती है . तो हम इसे खुजलाने लगते है . और ऐसा करने पर हमारे घर के बड़े बुजुर्ग हमे यह कहते है की इस फोड़े को मत खुजलाओं . खुजलाने से यह ज्यादा पक जायेगा और ज्याद जगह पर फ़ैल जायेगा .

यह खुजली हमारे शरीर के भीतर जो अनावश्यक तत्व मौजूद है उन्हें बाहर निकालने के कारण होती है .

अर्थात खुजली का महसूस होना ही शरीर शुद्धिकरण की प्रक्रिया का एक हिस्सा है . ध्यान रहे शरीर निर्माण में भी खुजली का महसूस होना एक आम बात है .

जैसे हम कोई मीठी चीज खाते है तो हमारा मन बार बार उसे खाने के लिए कहता है . ठीक इसी प्रकार हमारे मन में काम वासना से सम्बंधित इच्छाये भी उठती रहती है .

जब हम मन का सयम खो देते है तो हमारा मन कामवासना की तरफ तेजी से जाने लगता है . अर्थात हम जो भी ऊर्जा जिस किसी भी माध्यम से ग्रहण करते है उसको हमारे मन में शरीर के रूप में धारण करने के बजाय हम इस ऊर्जा का अधिकांश भाग भोग विलास में व्यर्थ कर देते है .

और धीरे धीरे हमारी सोचने समझने की शक्ति कमजोर होने लगती है . जिससे हमारा खान पान और रहन सहन तथा आचार विचार भी निम्न स्तर के होने लगते है . और अब मन में धीरे धीरे गंदे विचार आने लगते है . फिर धीरे धीरे हमारे शरीर की धातुएं पतली होने लगती है . अर्थात असंयमित जीवन शैली के कारण वीर्य धारण की प्रक्रिया गड़बड़ाने लगती है . जिससे शरीर में से अनेक माध्यमों से पोषक तत्व बाहर निकलने लगते है .

और साथ ही हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता भी घटने लगती है .

इसलिए जब ऐसा इंसान किसी दूसरे इंसान के साथ योन सम्बन्ध बनाता है तो यहां भी बीमारियों का आदान प्रदान होने लगता है.

इस प्रकार हम नाभि से निचे के प्रदेश के रोगों से ग्रसित होने लगते है . अर्थात हमारे शरीर का मुख्य केंद्र पेट की नाभि होती है .

नाभि से ऊपर की और जीवन यात्रा प्रभु को प्राप्त करने की होती है और नाभि से निचे की जीवन यात्रा इस संसार में भटकने की होती है .

इसलिए धीरे धीरे नाभि से निचे की और जाने वाला व्यक्ति मतलब वासनाओं में लिप्त व्यक्ति गुप्त रोगों का शिकार होने लगता है .

और ऐसा व्यक्ति प्रकृति की बार बार चेतावनी पर भी यदि गन्दी क्रियाये करना नहीं रोकता है तो फिर असाध्य गुप्त रोगों का शिकार हो जाता है .

और इन रोगों से व्यक्ति हर तरह से टूट जाता है .

इन रोगों क़े लक्षण निम्न प्रकार है :

·         खुद की नज़र में गिरना

·         समाज की नज़र में गिरना

·         आत्मविश्वास खोना

·         दिल का घबराना

·         बुद्धि का कमजोर होना

·         हमेशा थकान रहना

·         चिड़चिड़ा स्वभाव होना

·         क्रोध अधिक आना

·         आँखों क़े आगे अँधेरा आना 

ऐसे और भी कई प्रकार क़े लक्षण महसूस होने लगते है .

अब इन रोगों क़े स्थायी समाधान पर बात करते है :

 पूरी सच्ची श्रद्धा और भक्ति क़े साथ नियमित रूप से स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करना बहुत अनिवार्य है .

भोजन में मिर्च मशालों का प्रयोग कम करना चाहिए .

अपने मन का ध्यान गुप्त रोगों पर ले जाकर भीतर ही भीतर यह स्वीकार करे की ये मेरे ही माध्यम से किये गए कर्मो का फल है .

अपने गुप्त रोगों को शत प्रतिशत स्वीकार करके प्रभु को बार बार धन्यवाद दे की प्रभु आप ने मुझे इन रोगों क़े रूप में चेतावनी देकर नींद से जगा दिया है .

यदि आप को अभी इन गुप्त रोगों की पीड़ा सहन नहीं हो रही है तो आप किसी होशियार चिकित्सक से इलाज ले सकते है .

पर ध्यान रहे इन रोगों का स्थायी समाधान स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास ही है .

अपने रोगों की चर्चा हर किसी से न करे .

जितना ज्यादा आप सिर से लेकर पाँव तक में एकाग्र होकर स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करेंगे तो आप देखेंगे की आप क़े गुप्त रोग धीरे धीरे अब ठीक हो रहे है .

इस अभ्यास से आप का आत्मविश्वास लौटने लगता है .

आप क़े शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगती है .

आप का मन सत्संग में लगने लगता है . आप एक तेजस्वी ओजस्वी व्यक्ति में रूपांतरित होने लगते है .

यदि आप पशुओं से प्राप्त पदार्थो का सेवन करेंगे और इन पशुओं की सेवा नहीं करते है . तथा आप ने जो पशूओं से प्राप्त पद्धार्थ खरीदे है उन पशुओं पर यदि बहुत अत्याचार हुए है . तो आप समझले की ये पद्धार्थ आप क़े गुप्त रोगों को अवश्य बढ़ायेंगे.

इसलिए आप इनका सेवन कम करने का अभ्यास करे . इससे आप क़े अवचेतन मन में जमा पशु चेतनाये अपने आप मुक्त होने लगेगी और आप स्वरुप दर्शन क्रिया क़े अभ्यास में जिन भावों में रहने का अभ्यास करेंगे वैसी ही चेतनाये अवचेतन मन क़े रूप में विकसित होने लगेगी .

इसलिए यदि आप ध्यान में पारंगत है तो आप सीधे भी गुप्तरोगों की चेतनाओं को देवत्व भाव की चेतनाओं में रूपांतरित कर सकते है .

आप को अब इसी क्षण से इसलिए खुश रहना शुरू कर देना चाहिए की ये गुप्त रोग आप को एक वरदान क़े रूप में मिले है .

इन्ही गुप्त रोगों क़े कारण आप स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास सीख रहे है . वरना शरीर से एक सुखी व्यक्ति जो अभी कई प्रकार क़े व्यसन कर रहा है और किसी भी बीमारी से पीड़ित नहीं है तो ऐसा इंसान बिना किसी बड़े खतरे क़े प्रभु को कहाँ याद करता है .

हम सभी ने सुना है:

दुःख में सुमिरन सब करे , सुख में करे न कोई

सुख में सुमिरन करे , तो दुःख काहे को होय

इसलिए मेरे प्रिय मित्रों आप आज ही से स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास शुरू करे और अपने जीवन की गाड़ी को सच्ची खुशियों की तरफ ले चले .

विश्वास करे की आप का जन्म आज ही हुआ है .

यदि आप स्वरुप दर्शन क्रिया योग मिशन से पूर्ण निश्वार्थ भाव से जुड़ रहे है तो मुझे कमेंट क़े माध्यम से अवगत कराये . ऐसा करने से आप क़े अभ्यास की सफलता की दर बढ़ने लगती है .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .