भारत में PCOS और एंडोमेट्रियोसिस का पता लगाने में सालों क्यों लग जाते हैं? विशेषज्ञों के जवाब

Why Do PCOS and Endometriosis Diagnoses Take Years in India? Expert Answers

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और एंडोमेट्रियोसिस भारत में महिलाओं में पाई जाने वाली आम लेकिन देर से पहचानी जाने वाली स्त्री रोग समस्याएँ हैं। जागरूकता बढ़ने के बावजूद, कई महिलाओं को सही बीमारी का पता चलने में कई साल लग जाते हैं। इस देरी का असर उनकी सेहत, प्रजनन क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। विशेषज्ञ इसके पीछे कई सामाजिक, चिकित्सा और व्यवस्था से जुड़े कारण बताते हैं।

1. पीरियड के दर्द को सामान्य मान लेना

भारत में अक्सर मासिक धर्म के दौरान होने वाले तेज दर्द को सामान्य समझ लिया जाता है। लड़कियों को बचपन से ही सिखा दिया जाता है कि पीरियड में दर्द होना आम बात है। इसी वजह से एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण जैसे तेज पेट दर्द, संभोग के समय दर्द और लगातार थकान को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

इसी तरह PCOS में होने वाली अनियमित माहवारी, वजन बढ़ना या चेहरे पर बाल आना जैसी समस्याओं को भी तनाव या सामान्य हार्मोन बदलाव मान लिया जाता है।

2. जानकारी की कमी

शहरों में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन छोटे शहरों और गांवों में अभी भी इन बीमारियों के बारे में कम जानकारी है। PCOS के लक्षण जैसे मुंहासे, बाल झड़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल और अनियमित पीरियड को लोग गंभीरता से नहीं लेते।

एंडोमेट्रियोसिस की पहचान और भी मुश्किल है, क्योंकि इसके लिए विशेष जांच और कभी-कभी सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कई महिलाएं अलग-अलग डॉक्टरों के पास जाती हैं, लेकिन सही कारण पता लगाने में समय लग जाता है।

 

3. प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ा सामाजिक संकोच

भारत में आज भी मासिक धर्म और महिलाओं के निजी स्वास्थ्य विषयों पर खुलकर बात नहीं की जाती। कई महिलाएं दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग या बांझपन जैसी समस्याओं के बारे में डॉक्टर से खुलकर बात करने में झिझकती हैं। इस कारण वे समय पर जांच नहीं करवातीं।

अक्सर महिलाएं तब डॉक्टर के पास जाती हैं जब उन्हें गर्भधारण में परेशानी होती है, जबकि लक्षण कई साल पहले से मौजूद होते हैं।

4. लक्षणों का अन्य बीमारियों से मिलना

PCOS और एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण कई बार दूसरी बीमारियों जैसे थायरॉइड या पेट की समस्या से मिलते-जुलते हैं।

  • PCOS को कभी-कभी सिर्फ हार्मोनल गड़बड़ी मान लिया जाता है।

  • एंडोमेट्रियोसिस के दर्द को गैस या पेट की बीमारी समझ लिया जाता है।

इस वजह से महिलाओं को सिर्फ दर्द की दवा या सामान्य इलाज दिया जाता है, लेकिन पूरी जांच नहीं की जाती।

5. विशेषज्ञ इलाज की कमी

हर जगह विशेषज्ञ स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होते। एंडोमेट्रियोसिस की सही पहचान के लिए खास अल्ट्रासाउंड या लेप्रोस्कोपी जैसी जांच की जरूरत होती है, जो छोटे शहरों में आसानी से उपलब्ध नहीं होती।

PCOS की पहचान के लिए हार्मोन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और लक्षणों का सही मूल्यांकन जरूरी है। कई बार जांच पूरी न होने के कारण सही निदान में देरी हो जाती है।

6. आर्थिक कारण

बार-बार डॉक्टर दिखाना, टेस्ट करवाना और इलाज करवाना महंगा पड़ सकता है। कई परिवार खर्च के कारण जांच टाल देते हैं। गांवों में रहने वाली महिलाओं को जांच के लिए बड़े शहर जाना पड़ता है, जिससे खर्च और समय दोनों बढ़ते हैं।

7. मानसिक प्रभाव और आत्म-संदेह

लगातार दर्द या अनियमित लक्षणों के बावजूद जब बीमारी का पता नहीं चलता, तो महिलाएं खुद को ही दोष देने लगती हैं। उन्हें लगता है कि शायद समस्या उतनी गंभीर नहीं है। इससे चिंता और तनाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीरियड का दर्द बहुत ज्यादा हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

8. किशोरावस्था में जांच की कमी

PCOS की शुरुआत अक्सर किशोरावस्था में होती है। लेकिन शुरुआती वर्षों में अनियमित पीरियड को सामान्य समझ लिया जाता है। समय पर जांच न होने से आगे चलकर वजन बढ़ना, शुगर की समस्या और गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है।

क्या किया जा सकता है?

  • स्कूलों में मासिक धर्म और महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी दी जाए।

  • परिवार में इन विषयों पर खुलकर बातचीत हो।

  • नियमित रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करवाई जाए।

  • अगर दर्द बना रहे तो दूसरी राय ली जाए।

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों को इन बीमारियों की पहचान की बेहतर ट्रेनिंग दी जाए।

 

निष्कर्ष

भारत में PCOS और एंडोमेट्रियोसिस का देर से पता लगना केवल चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच और स्वास्थ्य व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। समय पर पहचान और सही इलाज से महिलाओं का जीवन बेहतर हो सकता है।

अगर मासिक धर्म का दर्द बहुत ज्यादा हो, पीरियड लंबे समय तक अनियमित रहें या गर्भधारण में समस्या हो, तो तुरंत योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। महिलाओं का दर्द सामान्य नहीं है — उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।