भक्त के प्रश्न और भगवान् के उत्तर
09 Oct, 2025
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प्रश्न 1 : भगवान लोग मुझे पागल समझते है मै क्या करू ?. प्रश्न 2 : भगवान् आप का रूप कैसा दिखता है ?. प्रश्न 4 : भगवान् मुझे नौकरी कैसे मिले ?. प्रश्न 5 : भगवान् मेरी पत्नी मेरा कहना नहीं मानती है . आप उपाय बताये ?.
प्रश्न 1 : भगवान लोग मुझे पागल समझते है मै क्या करू ?
उत्तर : लोगों के भीतर और बाहर केवल मेरा रूप ही देखने का अभ्यास करो .
प्रश्न 2 : भगवान् आप का रूप कैसा दिखता है ?
उत्तर : मेरे दो रूप है . एक साकार और दूसरा निराकार
प्रश्न 3 : भगवान मुझे आप का लोगों में कोनसा रूप देखना चाहिए ?
उत्तर : यदि तुम , जैसे लोग शरीर रूप में दिखते है वैसे ही तुम इन लोगों को मेरा ही रूप स्वीकार कर सकते हो तो बहुत अच्छा . फिर तुम बहुत ही शीग्रता से मुझसे जुड़ाव को महसूस कर लोगे .
और यदि तुम इन लोगों को जैसे वे शरीर रूप में दिखाई देते है वैसे अभी स्वीकार नहीं कर सकते हो तो फिर अपने मन का ध्यान खुद की दोनों आँखों के बीच स्थित करके इन लोगों के आज्ञा चक्र को मेरा स्वरुप स्वीकार करने का अभ्यास करो .
ये दोनों ही तरीके स्वरुप दर्शन के अभ्यास के अंतर्गत आते है .
प्रश्न 4 : भगवान् मुझे नौकरी कैसे मिले ?
उत्तर : आप स्वरुप दर्शन का अभ्यास इस प्रकार से करे की अभी आप के भीतर ऐसा क्या शेष है जो आप किसी और के नौकरी करके ही सीख सकते है . जब आप अपने भीतर इस जरुरत को महसूस करेंगे तो फिर मै खुद आप के लिए नौकरी के रूप में प्रकट होऊंगा .
प्रश्न 5 : भगवान् मेरी पत्नी मेरा कहना नहीं मानती है . आप उपाय बताये ?
उत्तर : तुम अपनी पत्नी को ऐसा क्या कह रहे हो की उससे तुम्हारी पत्नी को एक बंधन महसूस होता है . तुम अपनी पत्नी को पहले पूर्ण स्वतंत्र करो . अर्थात आप की पत्नी जैसी भी है वैसी ही स्वीकार करो . जब तुम अपनी पत्नी को पूर्ण रूप से सच्चे भावों से स्वीकार कर लोगे तो फिर तुम्हारी पत्नी तुम्हारे से भीतरी रूप से जुड़ जाएगी .
मतलब जैसे अभी आप का हाथ तुम्हारे से जुड़ा हुआ है इसलिए तुम यदि इसे ऊपर उठाना चाहो तो ऊपर उठा सकते हो या निचे जमीन पर टिकाना चाहो तो जमीन पर टीका सकते हो . क्यों की तुम मेरे प्राण हो और जो प्राण तुम्हारे हाथों में लगातार बह रहे है वे प्राण भी मेरे से ही प्रकट हो रहे है . अब चूँकि तुम्हारा मन तुम्हारे इन हाथों में बह रहे प्राणों से जुड़ा हुआ है .
अर्थात तुमने अपने हाथों को स्वीकार कर रखा है . इसलिए तुम अपने हाथों को हिला डुला पा रहे हो .
ठीक इसी प्रकार से जब तुम अपनी पत्नी को स्वीकार करने का अभ्यास करोगें तो फिर धीरे धीरे तुम इन हाथों की तरह ही अपनी पत्नी को भी अपनी बात सही से समझा पाने में शत प्रतिशत सफल होने लगोगे.
धन्यवाद जी . मंगल हो जी .
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