आपको कर्म को भुगताने के लिए कैसे प्रारब्ध आप की बुद्धि को घुमा देता है ?

स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास आप को आगंतुक कर्मो के प्रति सचेत करता है . इसलिए जब आप निरंतर स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करते है तो धीरे धीरे आप को यह पता चलने लगता है की कोनसा कर्म आपको भुगतना ही पड़ेगा और किस कर्म को आप रूपांतरित कर सकते है .

आपको कर्म को भुगताने के लिए कैसे प्रारब्ध आप की बुद्धि को घुमा देता है ?
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