आप का मुकेश लाया है कब्ज की असली दवा
23 Oct, 2025
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स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास आप के शरीर के एक एक सेल को नया बना देता है . पर आप अपना शरीर नया तभी बना सकते है जब आप का मन शत प्रतिशत निर्मल हो जाये .
मेरे प्यारे भाई और बहिनों स्वरुप दर्शन क्रिया योग ध्यान में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है . आज मुकेश आप को कब्ज से परेशान मेरे भाई और बहिनों के लिए ऐसा इलाज लेकर आया है जो यदि आप आजमाते है तो यह शत प्रतिशत काम करता ही करता है .
सबसे पहले मुकेश आप से पूछता है की आज तक आप को बिना प्रयास के क्या मिला है ?
यदि आप एकांत में चिंतन करेंगे तो आप को पता चलेगा की सबकुछ आप ही के कर्मो का हिसाब किताब हो रहा है .
आप अपने आप को शरीर मानकर कभी भी इस
कब्ज की समस्या से शत प्रतिशत ठीक नहीं हो सकते है .
क्यों की जब आप किसी के जीमने जाते है और वहाँ आप को एक ऐसा व्यक्ति मिल जाता है जो कब्ज से कई वर्षो से परेशान है और उसके दिमाग में यह बात फिट बैठ गयी है की आलू की सब्जी खाने से कब्ज होती है .
अब ऐसा व्यक्ति आप को आलू खाने से मना करेगा . और वे सभी लक्षण आप को बतायेगा जो वो खुद महसूस करता है .
अब
यदि आप खुद का विवेक इस्तेमाल नहीं करते है तो आप इस व्यक्ति के कहने पर आलू खाना
छोड़ देते है .
और आप ने भी अब अपने मन को ऐसा विकसित करना शुरू कर दिया है की अब आप भी कई लोगों को आलू खाने से रोकेंगे .
जबकि सच यह है की जब तक आप खुद आलू खाकर खुद पर प्रयोग नहीं कर लेते आपको आलू के बारे में वास्तविक ज्ञान कभी नहीं होगा .
यदि आप तनाव में जीते है और फिर आलू खाते है और फिर आप का पेट साफ़ नहीं होता है तो आप को यह विश्वास हो जाता है की आलू से कब्ज होती है .
मुकेश
यहां आप को केवल आलू का नाम समझाने के लिए कर रहा है . बाकी आलू आप के पेट में
जाकर क्या करेगा यह आप की वर्तमान स्तिथि और वर्तमान चिंतन पर निर्भर करता है .
अर्थात हम सभी हमारे प्रारब्ध भोग से ही जीवन जी रहे है . पर इसी प्रारब्ध को स्थायी ख़ुशी में बदलने के लिए हम सभी के पास परमात्मा की शक्ति हरसमय उपलब्ध है .
इसलिए आप सबसे पहले मुकेश के कहने पर अपनी कब्ज की समस्या को बहुत बहुत धन्यवाद दे . क्यों की इसी समस्या के माध्यम से आप प्रभु के इस ज्ञान के लेख से जुड़ रहे है .
हमारा पेट कोई बर्तन नहीं है जो इसमें खाना चिपक जाता है या खाना फस जाता है . हमारा पेट हमारे मन के भावों का ही साकार रूप है . अर्थात हमारा पूरा शरीर हम प्रतिक्षण जैसा महसूस कर रहे है वैसा ही साकार रूप में बदलता जा रहा है .
जैसे आज आप ने कब्ज के लिए एक बहुत ही
बढ़िया दवा ली है . और अब आप रात को सोने जाते है तो इससे पहले आप का किसी व्यक्ति
से झगड़ा हो जाता है .
और आप इस झगड़े के कारण पूरी रात तनाव में रहते है . तो अब आप कैसे यह उम्मीद कर सकते है की सुबह आप का पेट साफ़ हो जायेगा .
सबसे पहले आप मुकेश के कहने पर जो है आप के पास अभी वर्तमान में उसके लिए धन्यवाद कहे . और पूरे ह्रदय से प्रभु को धन्यवाद कहे .
आप को यह महसूस करना चाहिए की जिस शरीर को आप हरपल साथ लेकर घूम रहे है वह इस ब्रह्माण्ड की एक अलौकिक प्रयोगशाला है .
अर्थात
आप अपने शरीर पर प्रयोग करके पूरे शरीर को फिर से नया बना सकते है . जब आप का शरीर
ही नया बन जायेगा तो फिर कब्ज कहा रहेगी .
स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास आप के शरीर के एक एक सेल को नया बना देता है . पर आप अपना शरीर नया तभी बना सकते है जब आप का मन शत प्रतिशत निर्मल हो जाये .
मतलब स्वरुप दर्शन क्रिया के अभ्यास से आप के शरीर में पंच तत्व संतुलित होने लगते है . पेट में वात पित्त और कफ का संतुलन निर्मित होने लगता है . पेट में पर्याप्त मात्रा में प्राणशक्ति पहुंचने लगती है . जो वायु मल को निचे गुदा की तरफ धक्का देने के लिए आवश्यक होती है वह इस अभ्यास से आप के पेट को उपलब्ध होने लगती है .
सिर से लेकर पाँव तक में एकाग्रता के
अभ्यास के कारण आप के पेट में वे सभी रसायन पैदा होने लगते है जो आप के पाचन तंत्र
के ठीक से काम करने के लिए आवश्यक होते है .
क्यों की इस ध्यान के अभ्यास के कारण आप को भोजन के नियम पता चलने लगते है . पानी कितना पीना है और नींद कितनी लेनी है और आजीविका के लिए काम क्या करना है . अर्थात कब्ज किस वजह से है उसकी जड़ो को ही यह अभ्यास हमेशा के लिए ख़ुशी में बदल देता है .
मतलब आप भीतर से यह महसूस करने लग जाए की इस संसार में आप का कोई भी शत्रु नहीं है . आप यह महसूस करने लग जाए की जब आप का दुश्मन तरक्की करे तो आप को भीतर से ख़ुशी होने लगे .
क्यों
की जब तक आप जीवन से शिकायते करेंगे तब तक आप कब्ज जैसी परेशानी से शत प्रतिशत
मुक्त नहीं हो सकते है .
आप खुद मुकेश के लिए ईश्वर का रूप है . जैसे आप ने कोई घर पर जीमण का प्रोग्राम किया और आप का सच्चा मित्र आप के कहने पर भी इस प्रोग्राम में नहीं आया . तो यदि आप अपने सच्चे मित्र के नहीं आने पर भी बहुत ही प्रसन्नता के साथ मिठाई लेकर उसके घर जाते है और सबसे पहले अपने मित्र से यह पूछते है की मेरे दोस्त तू ठीक तो है न .
आगे आप पूछते है की मुझे चिंता हुयी की तू अपने प्रोग्राम में नहीं आया . मुझे चिंता इसलिए नहीं हुयी की तू मेरे प्रोग्राम में नहीं आया . मुझे चिंता इसलिए हुयी के कही तेरे साथ कुछ गलत तो नहीं हो गया . और फिर कहे की यदि तेरे साथ कुछ गलत हो गया हो तो मुझे मेरे दोस्त माफ़ करना मै तेरी मदद नहीं कर सका . क्यों की मेरे खुद के घर पर प्रोग्राम था . और मुझे बहुत सारे मेहमानों का आदर सत्कार करना था .
जब
आप अपने स्वभाव को इस प्रकार का बना लेते है तो फिर कब्ज आप के जीवन से हमेशा के
लिए विदा हो जाती है .
आप मुकेश के कहने
पर विश्वास करे की परमात्मा के अलावा कुछ भी नहीं है . इसलिए आप इस
संसार में एक राजा की तरह जीवन जिए . आप सच में खुद के और इस पूरे संसार के राजा
है .
जब आप स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करते है तो आप को राजा का सही अर्थ समझ में आने लगता है .
राजा वह होता है जो पहले अपनी प्रजा के लिए जीता है और फिर खुद के लिए .
मेरे
भाई और बहिनों आप आज ही से स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास शुरू करे . तो आप
देखेंगे की आप का शरीर बदल रहा है . अभ्यास के कारण आप के शरीर में खून बदलेगा , चमड़ी
बदलेगी , हड्डिया बदलेगी .
अब आप खुद ही अंदाजा लगाइये की जब आप के शरीर के पंचतत्व ही बदल रहे है तो आप को कई प्रकार के परिवर्तन महसूस होंगे . कभी दर्द , कभी चक्कर आना , कभी जी घबराना , कभी डर लगना , कभी सपने आना . मतलब कैसा भी परिवर्तन प्रकट हो सकता है .
ये परिवर्तन आप के प्रारब्ध पर निर्भर करते है . तथा आप का खुद में विश्वास कितना है इस आधार पर निर्भर करते है .
अभ्यास के दौरान यदि आप को परिवर्तन सहन नहीं होते है तो आप को जिस भी चिकित्सा पद्दति पर विश्वास है वहाँ से अपना इलाज ले सकते है . पर आप को अभ्यास कभी नहीं छोड़ना है .
धीरे धीरे आप की सभी प्रकार की दवाइयाँ
अपने आप छूटने लगती है .
आप की कब्ज आप की अप्राकृतिक जीवनशैली का परिणाम है . इसलिए मै आप को यह कैसे कह सकता हूँ की आप सुबह जल्दी उठकर गर्म पानी पिए . हो सकता है आप को गर्म पानी ज्यादा तकलीफ दे दे . और आप का मुकेश इस संसार में किसी को दुःख पहुंचाने नहीं आया है .
यदि किसी को गर्म पानी से कब्ज में फायदा हो गया है तो यह जरुरी नहीं है की आप को भी फायदा हो .
यह आप की प्रकृति पर निर्भर करता है .
धन्यवाद
जी . मंगल हो जी .
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