समस्या संसार में नहीं हमारे मन में है
24 Oct, 2025
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जब आप यह स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास एकांत में बैठकर करते है तो आप अपने मन के किस कदर गुलाम है उसका आप को साफ़ साफ़ पता चलने लगता है .
मेरे दोस्त यदि आप को चटपटा खाना बहुत पसंद है और आप को भीतर से यह पता है की ऐसा भोजन ज्यादा मात्रा में खाने से शारीरिक और मानसिक नुक्सान होते है फिर भी आप आदत के गुलाम होकर ऐसी गलती करते है तो इसे ठीक भी आप ही बहुत आसानी से कर सकते है .
आप अपने मन के साथ मुकेश के कहने से निम्न प्रयोग करके देखे :
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यह करे |
यह न करे |
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जब भी चटपटा खाने का मन हो तभी इस इच्छा पर गौर करे
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इच्छा जाग्रत होते ही तुरंत न भागे खाने के लिए |
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पहले चटपटे भोजन को ध्यान से देखे |
बिना देखे खाने पर टूटकर न पड़े |
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फिर इसकी खुशबू ले
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खुशबू यदि अच्छी न लगे तो इससे घृणा न करे |
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फिर इसे बनाने वाले को धन्यवाद कहे
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इसको पकाने या बनाने वाले की बुराई न करे |
इसी के साथ आप सिर से लेकर पाँव तक में एकाग्रता बनाये रखे
अब मन में यह भावना करे की यह चटपटा भोजन मेरे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही गुणकारी है
आप यह सब कार्य पूरे सच्चे मन से करे . झूठ का नाटक न करे .
अब आप एक एक कोर को मुँह में रखे और इसका स्वाद ले . पर ध्यान रहे की स्वाद में इतने गहरे नहीं डूब जाए की समय ही भूल गए
खाते समय पूरे शरीर में एकाग्रता बनाये रखे
सभी प्रकार के शरीर में होने वाले परिवर्तनों को ख़ुशी के साथ स्वीकार करे
स्वरुप दर्शन क्रिया का इस प्रकार से अभ्यास करने पर आप के मन में निम्न परिवर्तन होंगे :
· आप ज्यादा मात्रा में चटपटा भोजन नहीं खा पायेंगे
· आप की चेतना ऊपर की तरफ उठने के कारण चटपटे भोजन की इच्छा प्राकृतिक रूप से परिवर्तित होने लगेगी .
· भोजन को सूंघने के कारण इस भोजन को पचाने के लिए आवश्यक एंजाइम शरीर में बनने लगते है
· भोजन को प्यार से देखने के कारण चटपटे भोजन के भीतर से ज्ञान प्रकट होने लगता है
· जब आप यह स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास एकांत में बैठकर करते है तो आप अपने मन के किस कदर गुलाम है उसका आप को साफ़ साफ़ पता चलने लगता है
मुकेश आप को निम्न उदहारण से मन की गुलामी को समझा रहा है :
Ø आप किसी को देखकर कोई काम शुरू करते है और फिर परेशान होकर उसे बिना ख़ुशी के साथ करते है .
Ø अब यदि आप रोज काम के साथ ध्यान नहीं करते है तो अब आप का मन परेशान रहने की आदत को विकसित करने लगता है .
Ø और धीरे धीरे आप का स्वभाव परेशान करने वाला बन जाता है .
अब आप जरा गौर करे की सुबह जबरदस्ती उठकर आप योग , ध्यान , व्यायाम करते है और फिर मंदिर जाते है .
पर काम पर जाते समय यदि आप के परिवार के किसी सदस्य ने आप को कुछ बुरा कह दिया है तो आप भी ईट का जवाब पत्थर से देते है .
अब आप एकांत में बैठकर चिंतन करे की यदि आप किसी के ईट की मारे और सामने वाला आप को पत्थर से मारे तो आप को कैसा लगेगा ?.
मेरे हिसाब से आप को बहुत बुरा लगेगा .
और इसके बदले यदि सामने वाला आप को यह कहे की कोई बात नहीं आप ने मेरे ईट से जानबूझकर थोड़े ही मारी है .
अर्थात सामने वाला आप को सच्चे ह्रदय से क्षमा करदे तो आप को कैसा लगेगा .
आप के साथ आश्चर्य चकित कर देने वाली घटनाएं होगी .
ऐसा होने पर पहली बार आप को आत्मा की अनुभूति होगी .
मेरे दोस्त हमारे सभी दुखो का कारण शत प्रतिशत हम खुद ही होते है . और स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास आप को अंधविश्वासो से जाग्रत करता है .
मुकेश को इस अभ्यास को कोई भी एक नाम देना था ताकि मेरे साथी आसानी से इसे समझ सके .
मेरे दोस्त आप आत्मा है पर आप की आत्मा में कई प्रकार की इच्छाएं समाहित है . और ये इच्छाएं हमारे प्रभु से प्रकट होती है .
अर्थात आप का मन भी प्रभु की इच्छा से ही किसी आदत का गुलाम होता है . पर जब आप की आत्मा इन गुलामियों को सहन नहीं कर पाती है तो इसे इसके पिता प्रभु याद आने लगते है .
मतलब मुकेश यह कहना चाहता है की बिना प्रभु की शरण में जाए आप मन को कभी भी नहीं समझ सकते है .
मेरे दोस्त जिस दिन आप को यह विश्वास हो जायेगा की सबकुछ हमारे प्रभु जी ही कर रहे है तो आप के भीतर निम्न परिवर्तन होंगे :
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प्रभु में विश्वास से पहले |
प्रभु में विश्वास के बाद |
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आप तर्क वितर्क में फसते है |
आप कुतर्क नहीं करेंगे
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आप ऐसी मजाक नहीं करेंगे की पानी क्यों पीते हो दूध पिया करो |
यदि आप से कोई पानी मांगेगा तो यदि आप पानी पिलाने में सक्षम है तो आप विनम्रता से कहेंगे की जी अभी लाया .
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क्या होता है रोज रोज पानी पिने से
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यदि आप समर्थ नहीं है तो आप कहेंगे की मुझे क्षमा करे |
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क्या आप घर से पानी पीकर नहीं आये |
पानी के माध्यम से आप सेवा करके प्रफुल्लित हो जायेंगे |
मेरे दोस्त जब हमे मजाक करने का सही ज्ञान नहीं होता है तो फिर हम मर्यादा को लांघकर मजाक करने लग जाते है .
और ऐसा करके हमने जो स्वरुप दर्शन क्रिया के माध्यम से अपनी चेतना को ऊपर उठाया था वह वापस निचे गिर जाती है . अर्थात हम वापस पशुवृत्ति में आ जाते है .
जैसे आप पत्नी के साथ बाजार जाते है और पत्नी आप से महंगे वस्त्रों को लेने के लिए कहती है . अब आप मन की समझ नहीं होने के कारण बीच बाजार ही झगड़ा करने लगते है .
तो बाजार में वे सभी लोग जो आप की तरह सोचते है खुश होने लगते है . पर बाजार में वे लोग भी रहते है जो इस झगडे का पूरा परिणाम बहुत अच्छे से जानते है .
अब यदि दस लोग आप का तमाशा देखने आएंगे तो कोई एक आदमी आप को समझाने आएगा .
अब आप खुद ही देखे की बहुमत किसका है .
अर्थात बुराई बहुत तेजी से फैलती है और अच्छे के लिए खुद को तपाना पड़ता है .
अब मुकेश आप को एक प्रयोग करके देखने के लिए आमंत्रित कर रहा है :
आप अपने परिवार के उस सदस्य के लिए बाजार से ऐसी चीज खरीद के लाये जो उसे पसंद हो और आप के बजट में हो . और फिर बड़ी ही विनम्रता के साथ इस सदस्य को कहे की आप के प्रभु ने आप के लिए यह छोटा सा तोहफा भेजा है .
ऐसा अभ्यास के माध्यम से ही संभव हो पाता है.
क्यों की आप के घरवाले आप ही के कर्मो का फल है . अब आप इन फलों के साथ क्या करते है . यदि आप के कर्म अच्छे है तो यही फल आप को जीवन में नयी उचाईयों पर ले जायेंगे .
और यदि आप के कर्म बुरे है तो फिर यही घरवाले आप को निचे गिरा देंगे . इसलिए सबसे पहले आप अपने परिवार वालो को पूरी ईमानदारी से स्वीकार करने का अभ्यास करे .
यदि आप अपने घरवालों के साथ तालमेल बिठाने में कामयाब हो जाते है तो आप का जीवन इसी धरती पर आनंदमय हो जायेगा .
आप को केवल खुद को सादगी पसंद वाला इंसान बनाना है . जितना आप सहज और शांत रहेंगे भीतर से आप उतना ही ज्यादा मजबूत और शौर्यवान बनते जायेंगे .
मेरे दोस्त आप का मुकेश आप को यह विश्वास दिलाता है की यदि आप जीवन में सबसे पहले खुद की सेवा , फिर परिवार की सेवा तथा फिर समाज की सेवा बिना किसी चाहत के करेंगे तो एक दिन प्रभु जी आप को दर्शन अवश्य देंगे .
A. मेरे दोस्त आप किसी भी बहस में मत उलझो
B. किसी सरकार में दोष मत देखो
C. सरकार ने हमारे लिए जो अच्छे कार्य किये है आप केवल उन्ही को देखो
D. ठीक इसी प्रकार से किसी देवी देवता को बड़ा छोटा मत बोलो
E. किसी धर्म को ऊँचा निचा मत समझो
आप का धर्म केवल खुद को जानना और हरपल खश रहना है . और यदि आप ने स्वरुप दर्शन क्रिया को ठीक से समझ लिया तो यह शत प्रतिशत सत्य बात है की आप को जो भी चाहिए वह सब मिलेगा .
पर मिलेगा वही जो हमारे प्रभु के नियम के अंतर्गत आता हो . अर्थात आप जियो और जीने दो में विश्वास करने लग जाओगे.
आप एक अच्छे श्रोता बनकर मन को बहुत ही आसानी से समझ सकते है .
धन्यवाद जी . मंगल हो जी .
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