वो जो मेरी कहानी बनकर भी अधूरी रह गई...

हर शायरी, हर मिसरा, उसी की कोई बात होती है। जो कह नहीं पाया, वो अब काग़ज़ कह देता है। और शायद, मेरा टूटा दिल अब लफ़्ज़ों में मुकम्मल हो रहा है।

वो जो मेरी कहानी बनकर भी अधूरी रह गई...
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