उस शाम... जब उसकी उँगलियों ने मेरा नाम छू लिया

सूरज थक कर छिप रहा था और उसकी सुनहरी किरणें मेरी खिड़की के पर्दे से सरकती हुई उस पर गिर रही थीं। वो वहीं खड़ा था—कंधे टिकाए, होंठों पर वही पुराना-सा मुस्कुराता रहस्य...

उस शाम... जब उसकी उँगलियों ने मेरा नाम छू लिया
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