मन परमात्मा से प्रकट होता है . मन ही पूरी प्रकृति है . मन ही परमात्मा का साकार रूप है . मन को आप एक सॉफ्टवेयर की तरह समझे . सामान्यतया मन दो प्रकार का होता है : चेतन मन , अवचेतन मन
मन को समझे
आज का हमारा विषय है : मन को समझे
- मन परमात्मा से प्रकट होता है .
- मन ही पूरी प्रकृति है .
- मन ही परमात्मा का साकार रूप है .
- मन को आप एक सॉफ्टवेयर की तरह समझे .
सामान्यतया मन दो प्रकार का होता है :
- चेतन मन
- अवचेतन मन
चेतन मन आप की इन्द्रियों के विषय है . जैसे स्वाद , दृश्य , आवाज , स्पर्श इत्यादि .
अवचेतन मन इस मन रुपी सॉफ्टवेयर का डेटाबेस है .
और यह डेटाबेस चेतन मन के माध्यम से कार्य करता है .
चेतन मन परमात्मा से किस रूप में जुड़ा है इसी ज्ञान के अनुसार कार्य करता है.
अर्थात चेतन मन के माध्यम से यदि हम किसी दृश्य को देखते है तो यह मन इसकी जाग्रति के अनुसार ही अवचेतन मन से संपर्क करता है .
जैसे आप के चेतन मन ने इसकी आँखों के माध्यम से किसी दृश्य को देखा है . अब यह आप के इस चेतन मन की जाग्रति पर निर्भर करता है की आप इस दृश्य के साथ क्या करते है .
यदि आप पूरी तरह जाग्रत है तो आप इस दृश्य को वास्तविक रूप में पहचान लेंगे . और फिर इसी सच्ची पहचान के अनुसार आप जीवन में आगे बढ़ जायेंगे .
और यदि अभी आप का चेतन मन सही से जाग्रत नहीं है तो फिर यह इस दृश्य को पहचानने में धोखा खा सकता है . और जैसी यह इस दृश्य को लेकर समझ बनाएगा अर्थात यदि आप ने कभी इसी दृश्य के साथ जैसा भी व्यवहार किया है उसी के अनुसार आप के इस व्यवहार की यादे अवचेतन मन के रूप में डेटाबेस बना लेती है .
और फिर इस वर्तमान दृश्य को आप का चेतन मन देखकर अवचेतन मन डेटाबेस से संपर्क करने के लिए क्वेरी तैयार करता है .
इसी क्वेरी के अनुसार अवचेतन मन डेटाबेस से आउटपुट बाहर आता है . और आप इसी संचित याद के अनुसार अपने मन और शरीर के माध्यम से व्यवहार करते है .
जैसे आप की आँखों ने किसी व्यक्ति को देखा और साथ ही आप के साथ खड़े अन्य व्यक्ति की आँखों ने भी इसी व्यक्ति को देखा .
अब आप इस व्यक्ति को देखकर चोर चोर चिल्लाते है.
और दूसरा व्यक्ति इसी को देखकर कंवरसाहब कंवरसाहब पुकारता है .
अर्थात जो व्यक्ति आप के लिए चोर है वही व्यक्ति किसी दूसरे के लिए कंवरसाहब है .
ऐसा क्यों हुआ ?
यही तो कर्मो का खेल है .
इस व्यक्ति ने किसी न किसी समय आप की कोई भी वस्तु चुराई है . और इसी व्यक्ति ने आप के साथ खड़े अन्य व्यक्ति की बेटी से विवाह किया है .
इस प्रकार एक ही व्यक्ति इस संसार में एक ही समय पर अलग अलग किरदार निभा रहा है .
और ये सभी किरदार आप के डेटाबेस में अवचेतन मन के रूप में लगातार जमा हो रहे है .
अब यदि आप स्वरुप दर्शन का निरंतर अभ्यास कर रहे है तो फिर आप इस डेटाबेस को नये सिरे से लिख रहे है .
अब आप का नया डेटाबेस आप को वास्तविक ख़ुशी से जोड़ रहा है .
धन्यवाद जी . मंगल हो जी .
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