भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में ISM लॉन्च किया था, उद्देश्य था देश में सेमीकंडक्टर (चिप्स), फेब्रिकेशन, डिजाइन, पैकेजिंग, असेंबली-टेस्टिंग (ATMP / OSAT) आदि का मजबूत इकोसिस्टम बनाना — ताकि भारत निर्भरता कम कर सके और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन-क्षमता बढ़ा सके।
क्या है India Semiconductor Mission (ISM) — संक्षिप्त परिचय
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इसके लिए कुल लगभग ₹76,000 करोड़ का प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) प्रावधान किया गया था। The Times of India+2Press Information Bureau+2
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योजना थी कि फेब + डिजाइन + पैकेजिंग + टेस्टिंग — यानी चिप्स तैयार होने से लेकर अंत उपयोग (smartphones, electronics, auto, defence…) तक का पूरा चेन भारत में स्थापित हो। Press Information Bureau+2Carnegie Endowment+2
✅ अभी तक हुई मुख्य प्रगति और महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
• परियोजनाओं (Projects) की मंजूरी और बड़े निवेश
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अब तक कुल 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, विभिन्न राज्यों में फैले हुए। इनका कुल निवेश लगभग ₹1.60 लाख करोड़ है। Carnegie Endowment+2Business Standard+2
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इन परियोजनाओं में wafer-fab, OSAT/ATMP (assembly, testing, packaging), compound semiconductor, पैकेजिंग, आदि शामिल हैं। Carnegie Endowment+2The Times of India+2
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उदाहरण के लिए, Tata Electronics / Tata Semiconductor Manufacturing ने गुजरात के Dholera (SIR) में फेब लगाने का अनुबंध किया है, जिसके लिए सरकार 50% वित्तीय सहायता दे रही है। ThePrint+1
• उत्पादन (fabrication) + असेंबली/पैकेजिंग (OSAT / ATMP) पर काम शुरू
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2025 में, गुजरात के सानंद (Sanand) में एक OSAT पायलट-लाइन सुविधा शुरू हुई है — यह भारत की पहली end-to-end assembly & test लाइन है। ETTelecom.com+2Press Information Bureau+2
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उसी कार्यक्रम में, Vikram 32-bit microprocessor — भारत का पहला “Made-in-India” सेमीकंडक्टर चिप — प्रस्तुत किया गया, जो इस प्रगति का प्रतीक है। The Times of India+2The New Indian Express+2
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सरकार कह रही है कि इस मिशन के तहत डिजाइन, निर्माण, असेंबली, पैकेजिंग — हर स्तर पर भारत अब सक्रिय हो रहा है। The New Indian Express+2The Times of India+2
• डिजाइन और R&D गतिविधियाँ — चिप डिज़ाइन में भारत की भागीदारी
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ISM का एक हिस्सा डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (Design Linked Incentive – DLI) है। इसके तहत चिप डिज़ाइन-प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। Press Information Bureau+1
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नए design-centres खोलने की पहल की गई है — जिससे भारत चिप डिज़ाइन और नवाचार में भी आत्मनिर्भर बनेगा। Press Information Bureau+2Carnegie Endowment+2
• दायरा विस्तारित – विभिन्न प्रकार के सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीकों की ओर
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केवल सामान्य सेमीकंडक्टर नहीं — अब भारत ने Silicon Carbide (SiC) व फ़्यूचर-वेफर टेक्नोलॉजी की ओर ध्यान दिया है। Press Information Bureau+2ETTelecom.com+2
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साथ ही, सरकार अगले “India Semiconductor Mission 2.0” की तैयारी कर रही है — जो और अधिक आधुनिक nodes (जैसे 5–7 nm या उससे आगे), बेहतर packaging और नई फ़ैब्रिकेशन टेक्नोलॉजी पर केंद्रित होगी। Hindustan Times+2ETTelecom.com+2
🔎 2025 तक की वर्तमान स्थिति — कहाँ खड़ा है भारत
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2025 में देश की सेमीकंडक्टर यात्रा ने स्पष्ट रूप से गति पकड़ ली है। किमती निवेश, फेब्रिकेशन यूनिट्स, assembly / test units, और डिज़ाइन-सेन्टर — सभी स्तरों पर काम चल रहा है। The Times of India+3Carnegie Endowment+3The New Indian Express+3
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रिपोर्ट्स कहती हैं कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो भारत की सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक US$ 100–110 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है। NDTV India+2The Times of India+2
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सरकार और उद्योग दोनों ओर से भरोसा है कि भारत आने वाले कुछ सालों में “चिप्स डिज़ाइन और मेन्युफैक्चरिंग हब” बन सकता है। The Times of India+2ThePrint+2
⚠️ चुनौतियाँ और आगे की राह — अभी क्या करना बाकी है
हालाँकि प्रगति हुई है, लेकिन सेमीकंडक्टर उद्योग में स्वयं-निर्भरता हासिल करना आसान नहीं है:
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चिप निर्माण (fab) के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी, मशीनरी, और विशेषज्ञता चाहिए — ये सब अभी भारत में विकसित हो रहे हैं।
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चिप्स के design, fabrication, पैकेजिंग, और test chain — हर स्तर पर एक मजबूत supply-chain, skilled workforce और supporting ecosystem चाहिए, जिसे समय के साथ बनाना होगा।
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वैश्विक प्रतिस्पर्धा बहुत तेज है — कई देश पहले से सेमीकंडक्टर hub हैं। भारत को quality, cost-competitiveness और विश्वसनीयता के साथ आगे बढ़ना होगा।
सरकार के “ISM 2.0” जैसे नए फेज़, नए नियम, बेहतर सुविधा और निवेश के प्रस्ताव इस राह को आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। Hindustan Times+2ETTelecom.com+2
🌍 क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम — भारत और विश्व दोनों के लिए
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आज सेमीकंडक्टर केवल स्मार्टफोन या कंप्यूटर के लिए नहीं — defence, space, automotive (EV), telecommunication, data-centers, AI, IoT जैसे हर क्षेत्र में ज़रूरी हैं। भारत की इस capability से देश की टेक-स्वतंत्रता और रणनीतिक क्षमता मजबूत होगी। The Times of India+2Press Information Bureau+2
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अगर भारत सफल रहा, तो वह global supply-chains का विश्वसनीय हिस्सा बनेगा; इससे न सिर्फ आयात कम होंगे बल्कि बड़ी संख्या में उच्च-कौशल नौकरियाँ भी बनेंगी।
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यह step भारत को विश्व-स्तर पर तकनीकी एवं आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा — “Made-in-India” चिप्स सिर्फ घरेलू नहीं, global markets के लिए भी।
🧭 निष्कर्ष — India Semiconductor Mission: एक व्यावहारिक शुरुआत, लेकिन लंबा सफर अभी बाकी
संक्षेप में, ISM ने 2021 से 2025 तक — मात्र चार सालों में — एक प्रभावशाली शुरुआत कर दी है। 10+ प्रोजेक्ट्स, भारी निवेश, fabrication units, assembly & packaging infrastructure, chip-design efforts — यह सब दिखाता है कि भारत सिर्फ योजना बना रहा नहीं, बल्कि अमल में लगा है।
लेकिन, सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एक जटिल, पूँजी-गहन और तकनीकी रूप से demanding क्षेत्र है। असली परीक्षा तब होगी, जब बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होगा, चिप्स की गुणवत्ता विश्व-स्तर की होगी, और भारत global supply-chains में प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरेगा।
अगर आप चाहें — मैं 2025 तक ISM के आंकड़ों के साथ एक डिटेल्ड टाइमलाइन बना सकता हूँ (मंजूरी, निवेश, प्रोजेक्ट, राज्यों, कंपनियों सहित)।
यह आपके लिए उपयोगी होगा — ताकि आप देख सकें, “कहाँ से शुरू हुआ — कहाँ तक पहुँचा।”
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