आप राजा इसलिए है क्यों की आप के पास वह सभी शक्तियाँ और ज्ञान हरसमय है जो हमारे परमात्मा के पास है . अर्थात आप के पास किसी भी चीज की कमी नहीं है .
हम सब राजा भी है और नौकर भी
हम सब राजा भी है और नौकर भी
आपका मुकेश आप के
मन में चलने वाले प्रश्नों का उत्तर दे रहा है :
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प्रश्न १ |
मै राजा कैसे हूँ ? |
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उत्तर |
आप राजा इसलिए है क्यों की आप के पास वह सभी शक्तियाँ और ज्ञान हरसमय है जो हमारे परमात्मा के पास है . अर्थात आप के पास किसी भी चीज की कमी नहीं है . |
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प्रश्न २ |
मै नौकर कैसे हूँ ? |
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उत्तर |
आप नौकर इसलिए है जैसे आप एक बहुत ही सफल व्यवसाय चलाते है . पर आप भी अपने कर्मचारियों पर निर्भर रहते है . यदि कोई कर्मचारी जानबूझकर आप का काम करने के लिए मना कर दे तो आप कुछ भी नहीं कर सकते है . जैसे आप की जानकारी प्रधानमंत्री जी से है पर यदि प्रधानमंत्री जी भी अपना कोई जरुरी कार्य कर रहे हो तो आप भी उस समय उनसे नहीं मिल सकते है . अर्थात हम सभी समय के नौकर है . |
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प्रश्न ३ |
आप कहते है और समझते भी है की आप रटकर पढाई नहीं करते है . क्या यह बात सही है ? |
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उत्तर |
नहीं . इस दुनिया में ऐसा कोई भी इंसान नहीं है जो चीजों को रटता नहीं हो . जैसे आप भौतिक विज्ञानं पढ़ते है तो जो न्यूटन ने नियम दिया है आप भी तो उसे ही मानकर याद कर रहे है . या जैसे आप के माता पिता ने आप को जो नाम दिया है आप ने भी तो लोगों के मुँह से सुन कर रट लिया है . |
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प्रश्न ४ |
क्या आप को पता है की आप का वजन कितना है ? |
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उत्तर |
सब को पता नहीं है . आप का शरीर पंचतत्व से बना हुआ है और लगातार ब्रह्माण्ड में व्याप्त इन तत्वों से दृश्य और अदृश्य रूप से पोषण ले रहा है . मतलब आप का शरीर धरती से इस प्रकार जुड़ा हुआ है जैसे आप के कंधे से हाथ जुड़ा हुआ है . अब आप पूछेंगे की कैसे ? आप पृथ्वी के बिना रह नहीं सकते है . इसलिए आप के वजन में पृथ्वी का वजन भी जुड़ेगा . और पृथ्वी ब्रह्माण्ड से जुडी हुयी है . इसलिए आप का वजन पूरे ब्रह्माण्ड से भी जुड़ेगा . और पूरा ब्रह्माण्ड निराकार अनंत परमात्मा से सीधा जुड़ा हुआ है . इसलिए आप का वास्तविक वजन परमात्मा के वजन के बराबर है . अर्थात आप का वजन अनंत है . |
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प्रश्न ५ |
प्रधानमन्त्री महान है या एक साधारण गरीब किसान ? |
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उत्तर |
दोनों बराबर महान है . क्यों की जो काम प्रधानमंत्री कर सकता है वह काम साधारण किसान नहीं कर सकता है . और जो काम साधारण किसान कर सकता है वह प्रधानमंत्री नहीं कर सकता है . |
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प्रश्न ६ |
क्या खेल में जितने वाला ही महान होता है ? |
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उत्तर |
नहीं . जब एक हारेगा ही नहीं तो दूसरा जीतेगा कैसे . इसलिए दोनों महान होते है . तभी तो हमारे प्रभु कह रहे है की तेरी हार में भी मै ही हूँ और तेरी जीत में भी में ही हूँ . |
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प्रश्न ७ |
राहुल गाँधी ज्यादा ज्ञानी है या नरेंद्र मोदी ? |
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उत्तर |
दोनों नेता बराबर ही ज्ञानी है . क्यों की यदि कोई गलती ही नहीं करेगा तो फिर यदि आप को सही काम करना आता है तो आप इस सही काम को कब और किसके लिए करेंगे . यदि आप को पता चल जाये तो अपने मुकेश को इसका जवाब अवश्य देना . |
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प्रश्न ८ |
मुझे तलाभुना खाना बहुत पसंद है और इससे मेरी तबियत बहुत खराब रहती है . मै कैसे इसे छोड़ू ? |
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उत्तर |
स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करके आप इसे बहुत ही आसानी से छोड़ सकते है . अर्थात अपने आप को बदलने के लिए बिना शर्त प्रभु के हवाले करना ही होगा . तभी आप की आत्मा जाग उठेगी . और आप के भीतर आदत को बदलने की शक्ति जागने लगेगी . |
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प्रश्न ९ |
लोग हमेशा मुझे ही गलत ठहराते है . क्या करू ? |
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उत्तर |
यह तो आप के लिए बहुत ही ख़ुशी की बात है की अब आप का अच्छा समय आ गया है . आप लोगों की बातों को नज़रअंदाज करने के बजाय एक बहुत ही जाग्रत श्रोता की तरह ध्यान से सुने . तो आप को पता चल जायेगा की प्रारब्ध आप का पीछा कैसे कर रहा है . लोगों के माध्यम से आप ही के कर्म आप से हिसाब मांग रहे है . जब आप स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करेंगे तो आप को क्या करना है इसका उपाय खुद हमारे प्रभु ही आप को बतायेंगे. |
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प्रश्न १० |
मै स्वतंत्र हूँ या नियंत्रित हूँ या परतंत्र हूँ ? मार्गदर्शन कीजिये . |
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उत्तर |
यदि आप जिस पल परमात्मा से एकता स्थापित कर लेते है अर्थात आप को इसकी अनुभूति हो जाती है तो उस पल आप पूर्ण स्वतंत्र है . यदि आप को शरीर भाव की अनुभूति होती है और आप अभी भोजन और पानी जैसी आवश्यक चीजों पर निर्भर रहते है तो फिर आप प्रभु की प्रकृति से नियंत्रित है . और यदि आप पूर्ण बेहोशी में अपना जीवन जी रहे है अर्थात आप का खुद के ऊपर से विश्वास उठ चूका है तो फिर आप किसी भी अन्य जीव या अन्य किसी वस्तु के अधीन रहने लगते है . ऐसी स्तिथि में आप परतंत्र है . |
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प्रश्न ११ |
समाज लड़का लड़की में भेद क्यों करता है ? |
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उत्तर |
समाज भेद नहीं करता है . आप की खुद की दृष्टि भेद करती है . जैसे आप की पत्नी आप की बेटी को हर समय यह कहती है की तू तो पराये घर की है . पर आप क्या कहते है और भीतर से क्या सोचते है जरा इस पर भी पूरी ईमानदारी से गौर करो . यदि आप खुद अपनी बेटी को अपने बेटे के समान ही भीतर से समझते है तो फिर यह समाज भी आप के भीतर से ही जन्म लेता है . आप अपने संकल्प पर हमेशा अडिग रहे . अपनी पत्नी को कभी भी इस बात के लिए बाध्य न करे की वह अपनी बेटी को लेकर क्या सोच रखती है . क्यों की यदि आप अपनी सोच पर अडिग रहते है तो परमात्मा एक समय बाद आप की पत्नी की मति को इस तरह घुमायेंगे की अब वह भी कहने लगेगी की बेटी पराये घर की नहीं होती है . |
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प्रश्न १२ |
मेरा बच्चा मेरा कहना नहीं मानता है . मै क्या करू ? |
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उत्तर |
आप अपने बच्चे को क्यों सुधारना चाहते है . आप का बच्चा पहले से ही सुधरा हुआ है . आप केवल अपने भावों को निर्मल करने का अभ्यास करे . जैसे जैसे आप के भाव निर्मल होने लगेंगे आप का बच्चा अपने आप आप के नजदीक आने लगेगा . |
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प्रश्न १३ |
मेरे पति दारु पीकर रोज मुझे पीटते है . कई बार आत्महत्या के विचार आते है . मार्गदर्शन करे ? |
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उत्तर |
आप के मुकेश के कहने पर आप किसी भी एक भगवान् की पूजा करना शुरू करे . पर याद रहे आज यह भगवान् कल दूसरा भगवान् ऐसा नहीं चलेगा . जैसे आप शंकर भगवान् की पूजा करते है तो फिर हर जीव में शंकर भगवान् को ही देखने का अभ्यास करे . इसलिए अब आप अपने पति में भी शंकर भगवान को ही देखने का अभ्यास करे . इससे आप अपने पति को उसकी कमियों के साथ पूर्ण रूप से स्वीकार करने में सफल होने लगेगी . धीरे धीरे आप का मन आप के पति के लिए निर्मल होने लगेगा . तो इसका चमत्कार यह होगा की अब आप के पति का भी मन निर्मल होने लगेगा . आप का पति आप का प्रतिबिम्ब है . इसलिए जैसा आप अपने पति को भीतर से महसूस करेगी वैसी ही वह प्रतिक्रिया देगा . मुकेश ने आप को जो यह तरीका बताया है दुनिया में इससे सरल और सहज तरीका और कोई नहीं है . आप यदि भगवान के अलावा किसी अन्य से मदद मांगेगी तो फिर से आप नया कर्म बंधन बना लेगी . और भविष्य में इस का ऋण आप को ही चुकाना होगा . यही परम सत्य है . आप ज्यादा से ज्यादा स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास करे . पूजा के माध्यम से भी स्वरुप दर्शन क्रिया का अभ्यास किया जाता है . माध्यम कुछ भी हो आप का अंतिम लक्ष्य हरपल खुश रहना होना चाहिए . |
धन्यवाद
जी . मंगल हो जी .
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